झालावाड़ में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर गुरुवार को जिला मानसिक स्वास्थ्य इकाई और मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग की ओर से कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। गर्ल्स कॉलेज में हुई संगोष्ठी में स्टूडेंट्स को मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संकट और आत्महत्या की रोकथाम के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों को आत्महत्या रोकने की सामूहिक शपथ भी दिलाई गई। मानसिक समस्याओं पर खुलकर बात करने की सलाह जिला नोडल अधिकारी एवं मनोचिकित्सक डॉ. रश्मि गुप्ता ने स्टूडेंट्स से मानसिक समस्याओं पर खुलकर बात करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मानसिक समस्या के बारे में बात करना कमजोरी नहीं है, बल्कि समय पर मदद लेने की दिशा में अहम कदम है। डॉ. गुप्ता ने मानसिक तनाव और भावनात्मक संकट के शुरुआती संकेतों को पहचानने के बारे में भी बताया। उन्होंने जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने के तरीकों की जानकारी दी, ताकि मानसिक परेशानी से जूझ रहे व्यक्ति को समय रहते उचित सहयोग मिल सके। आत्महत्या रोकना पूरे समाज की जिम्मेदारी गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर चारुलता तिवारी ने कहा कि आत्महत्या रोकना केवल एक दिन का अभियान नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील बातचीत, समय पर संकट की पहचान, भावनात्मक सहयोग और सही इलाज से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने आत्महत्या से जुड़े चेतावनी संकेतों पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति लगातार बहुत निराशा की बातें करता है, खुद को दूसरों पर बोझ बताता है, अचानक लोगों से दूरी बनाने लगता है या सोशल मीडिया पर विदाई जैसे संदेश पोस्ट करता है, तो इन संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसे व्यक्ति की बातों को बिना किसी भेदभाव के ध्यान से सुनना चाहिए और उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। जरूरत महसूस होने पर परिवार के लोगों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए। मनोचिकित्सा विभाग में भी हुआ जागरूकता कार्यक्रम विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग में भी मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चर्चा की गई। यहां लोगों को मानसिक समस्याओं को समझने, संकट के संकेत पहचानने और समय पर सहायता लेने के लिए जागरूक किया गया। 14416 हेल्पलाइन की भी दी जानकारी कार्यक्रम में सरकार की टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 के बारे में भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि मानसिक संकट की स्थिति में व्यक्ति या उसके परिवार के सदस्य इस हेल्पलाइन के जरिए मदद ले सकते हैं। ये रहे मौजूद कार्यक्रम में सहायक आचार्य हर्षित शर्मा, योगिता शर्मा, रानू मीणा, शिखा खंडेलवाल, दिव्या मीणा, डॉ. नेहा पालीवाल, खुशबू विजय और राजेंद्र कुमार सहित कई लोग मौजूद रहे। मंच का संचालन डॉ. रुचि कुलश्रेष्ठ ने किया।