फलोदी जिले में 1050 फीट गहरे बोरवेल में गिरे 9 साल के बच्चे भोमाराम को बचाया नहीं जा सका। बच्चे का शव करीब 39 घंटे बाद बोरवेल से निकाला गया, लेकिन उसकी मौत पहले ही हो गई थी। बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचाने के प्रयास भी विफल रहे। इसके अलावा एक बड़ा पत्थर और पानी भी जान बचाने में बाधा बना। पुलिस-प्रशासन और देसी तकनीक भी काम नहीं आई। माना जा रहा है कि गुरुवार रात को ही बच्चे की बोरवेल में पानी के अंदर डूबने के कारण मौत हो गई थी। रेस्क्यू ऑपरेशन के असफल होने के 2 कारण सामने आए हैं… पहला कारण- कैमरे और बच्चे के बीच आया पत्थर,ऑक्सीजन भी नहीं भेज पाए पूनिया की ढाणी निवासी पाचाराम का 9 साल का बेटा भोमाराम 15 अक्टूबर दोपहर 12:30 बजे 1050 फीट गहरे बोरवेल में गिरा था। बोरवेल बाहर से 10 इंच का था लेकिन नीचे जाते-जाते उसकी चौड़ाई अलग-अलग थी। बच्चा बोरवेल की 640 फीट की गहराई में जाकर फंसा था। नीचे पत्थर होने के कारण अंदर कोई पाइप भी नहीं था। एसडीआरफ,एनडीआरएफ के साथ देसी जुगाड़ एक्सपर्ट माधाराम सुथार,नरपत सुथार के अलावा उनकी पूरी टीम बच्चे को निकालने के प्रयास में जुटी थी। रेस्क्यू के दौरान बच्चे की शर्ट निकल कर बोरवेल में धंसे एक पत्थर में फंस गई। शर्ट खींचने के प्रयास में पत्थर बाहर निकल गया और बोरवेल में फंस गया। इससे पहले कैमरे से बच्चे के मूवमेंट पर नजर रखी जा रही थी। कैमरे और बच्चे के बीच पत्थर आते ही मूवमेंट नजर आना बंद हो गया। बच्चे को ऑक्सीजन भी भेजी जा रही थी लेकिन पत्थर के कारण इसमें में भी परेशानी आने लगी थी। पत्थर को निकालने के लिए तीन से चार देसी जुगाड़ तैयार किए गए, जो असफल रहे। चौथा जुगाड़ सरिए से तैयार किया गया। सरिए के आगे चिमटा नुमा औजार लगाया। इसके बाद शुक्रवार रात करीब 10 बजे यानी 34 घंटे बाद पत्थर बाहर निकाला गया। दूसरा कारण- पानी के कारण बच्चे का मूवमेंट नहीं दिखा टीम अपने लगातार प्रयास से पत्थर निकालने में सफल रही लेकिन दूसरी चुनौती सामने आकर खड़ी हो गई। ये चुनौती थी पानी। बच्चे के 10 फीट ऊपर पानी था। टीम बच्चे का मूवमेंट जानने के लिए कैमरे को अंदर भेज रही थी। पानी के कारण फुटेज धुंधले होने लगे। ऐसे में टीम को अंदाजा लगाने में परेशानी होने लगी कि बच्चे का मूवमेंट किस तरफ है। माना जा रहा है कि गुरुवार रात को ही बच्चे की बोरवेल में पानी के अंदर डूबने के कारण मौत हो गई थी। एनिमेशन से समझें बोरवेल में कैसे गई बच्चे की जान… टीम का दावा: अब तक का सबसे लंबा रेस्क्यू नरपत सुथार ने बताया कि अब तक वे 8 रेस्क्यू कर चुके हैं। इनमें से दो रेस्क्यू में बच्चों को जिंदा बाहर निकाला है। उन्होंने बताया कि ये उनका अब तक का सबसे लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन था जो करीब 30 घंटे तक चला। दरअसल, माधाराम की टीम रेस्क्यू के लिए कैमरे से लेकर सरिया, औजार और वेल्डिंग मशीन तक अपने साथ लेकर चलती है। बोरवेल में कैमरा डाल कर अंदर के स्ट्रक्चर और बच्चों के मूवमेंट से वे जुगाड़ तैयार करते है। वहीं उनका सबसे छोटा रेस्क्यू बाड़मेर जिले के छोटू गांव का था, जहां उन्होंने महज दो घंटे में बच्चे को रेस्क्यू किया था। इकलौता बेटा था भोमाराम भोमाराम अपने पिता का इकलौता बेटा था। अब उनके दो बेटियां हैं। पाचाराम का परिवार 5 किलोमीटर दूर नौसर गांव का रहने वाला है। परिवार पूरे दिन काम करने के बाद शाम को दोबारा घर जाता था। चार महीने पहले ही इस खेत पर बने ट्यूबवेल पर काम करने आया था। परिवार के लोगों ने बताया कि हमेशा कि तरह भोमाराम उस दिन भी अपने पिता के साथ खेत पर आया था। ट्यूबवेल की मोटर खराब हो गई थी। पिता मोटर सही करवा रहे थे। इसी दौरान भोमाराम दौड़ते हुए अपने पिता की तरफ आया और ये हादसा हो गया। पिता के हाथ में मोटर थी। पिता उसे छोड़ बचाने दौड़े तब तक भोमाराम अंदर जा चुका था। पिता ने बताया था कि बोरवेल में गिरते समय मुझे बेटे के हाथ दिखे। (इनपुट: जुगल किशोर शर्मा, नौसर) हादसे से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए- बोरवेल में फंसे 9 साल के भोमाराम की मौत:39 घंटे बाद देसी जुगाड़ से बाहर खींचा, 640 फीट गहराई पर फंसा था बच्चा