जोधपुर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी की कोशिश में एक बुजुर्ग के 31 लाख रुपए बच गए। साइबर ठगों ने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर मनी लॉन्ड्रिंग और गिरफ्तारी का डर दिखाकर बुजुर्ग को डराया और डिजिटल अरेस्ट का खौफ दिखाया। हालांकि, बैंक मैनेजर की सूझबूझ और सतर्कता से रकम ट्रांसफर होने से बच गई। साइबर थाना पुलिस के मुताबिक, यह पूरा मामला 14 अक्टूबर 2026 को शुरू हुआ था। अज्ञात साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग व्यक्ति को वाट्सएप पर वीडियो कॉल किया। खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए ठगों ने डराया कि उनके खाते से अनैतिक कार्य और बैंक खातों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का अवैध लेन-देन हुआ है। ठगों ने बुजुर्ग को डराया कि उनके खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया जाएगा। उसे बताया गया कि वे अपने खातों की सारी राशि वेरिफिकेशन के नाम पर बताए गए सरकारी खातों में जमा करवा दें। जिससे गिरफ्तार होने से बच जाएगा। इसी डर के मारे बुजुर्ग अपनी तीन अलग-अलग बैंकों की एफडी तुड़वाकर 31 लाख रुपए जमा कराने बैंक पहुंच गए थे। मैनेजर ने साइबर थाने में दी सूचना बुजुर्ग आज PWD सर्किल के पास स्थित बैंक पहुंचा तो यस बैंक की डिप्टी मैनेजर मनीषा पंवार ने जब देखा कि एक बुजुर्ग व्यक्ति बैंक में बहुत बड़ा ट्रांजेक्शन करने आए हैं और उनकी गतिविधियां संदेहास्पद लग रही हैं, तो उन्हें साइबर ठगी का शिकार होने का अंदेशा हुआ। मैनेजर ने तुरंत इसकी सूचना साइबर पुलिस थाना जोधपुर को दी। सूचना मिलते ही साइबर थाने से SI राजेश कुमार और कॉन्स्टेबल धीरेन्द्र सिंह बैंक पहुंचे। वहां बुजुर्ग से समझाइश कर जब विस्तृत पूछताछ की गई, तो पता चला कि उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया गया है। साइबर टीम ने बुजुर्ग को साइबर अपराध के तरीकों के बारे में विस्तार से समझाया और अवेयरनेस देकर उनके 31 लाख रुपए सुरक्षित बचा लिए। बैंक में RTGS करवाने के लिए आए थे पीड़ित बुजुर्ग बैंक की डिप्टी मैनेजर मनीषा पंवार ने बताया कि बुजुर्ग आज बैंक में आरटीजीएस करवाने के लिए आए हुए थे। बैंक में बुजुर्ग की 18 लाख की FD थी। जो उन्होंने एक दिन पहले ऑनलाइन तुड़वा ली थी। इसके अलावा एक अन्य बैंक में भी बुजुर्ग की FD थी जिसे भी वह तुड़वाकर आरटीजीएस पैसा करवाने वाले थे। आज(शनिवार) दोपहर 12 बजे के करीब जब वह बैंक आए और उन्होंने आरटीजीएस करवाने के लिए जिस फर्म का नाम दिया। उसमें फर्म के नाम की इंग्लिश स्पेलिंग भी गलत थी और एंटरप्राइजेज में भी स्पेलिंग मिस्टेक थी। इसके चलते मुझे संदेह हुआ। मैंने उनसे इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर करवाने को लेकर पूछा तो पहले तो उन्होंने आनाकानी की बहाने बनाए। उन्होंने कहा कि पुणे में किसी को कोई सामान लेने के लिए पैसे देने हैं। लेकिन मैं उनको कस्टमर होने के नाते पहले से जानती थी। इसलिए मैंने उनसे पूछा कि पुणे में आपका कोई नहीं रहता है, इसलिए मुझे सही बात बताओ। ठगों ने पीड़ित के फोन को कर रखा था हैक पंवार ने बताया कि इस दौरान उनके हाव भाव देखकर मुझे संदेह हुआ कि ये किसी ठगों के चंगुल में फंसे हुए है। इसलिए मैंने सबसे पहले इनका फोन स्विच ऑफ करवाया। ठगों ने उनके फोन को हैक कर रखा था। उसके बाद उन्हें बैंक में बिठाकर तसल्ली से उन्हें विश्वास में लेकर यह भरोसा दिलाया कि आपके साथ कोई गलत नहीं होगा, आप मुझे पूरी बात बताओ। तब बुजुर्ग ने बताया कि साइबर ठगों ने उन्हें डरा दिया और कहा कि उनके खातों से मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर अलग-अलग फर्जी ट्रांजैक्शन किए गए हैं। मैने उन्हें बताया कि इस तरह से कुछ नहीं हुआ है। आप ठगी का शिकार बन रहे थे। इसके बाद पुलिस को भी सूचना दी गई। जोधपुर पुलिस की आमजन से अपील पुलिस, सीबीआई, ईडी, क्राइम ब्रांच या कोई भी सरकारी एजेंसी कभी भी वाट्सएप कॉल या वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। यदि कोई आधार कार्ड या बैंक खाते के दुरुपयोग का डर दिखाकर वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे जमा करवाने को कहे तो यह 100 प्रतिशत साइबर ठगी है। ऐसी किसी भी कॉल से घबराएं नहीं, तुरंत अपने नजदीकी पुलिस थाने या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।