जोधपुर नगर निगम के मेयर पदों को लेकर 25 सितंबर को चुनाव होने हैं। मेयर पद के लिए भाजपा ने प्रसन्नचंद मेहता और कांग्रेस ने राजेंद्र सोलंकी को प्रत्याशी बनाया था। सोमवार को दोनों दलों ने एक-दूसरे के प्रत्याशियों के नामांकन को लेकर ऑब्जेक्शन दर्ज करवाया है। इसे लेकर दोपहर 2:15 बजे निगम में ही दोनों पक्षों को सुना गया। करीब सवा घंटे तक इस मामले को लेकर सुनवाई हुई। इसके बाद शाम करीब 6 बजे फैसला सुनाते हुए​ रिटर्निंग अधिकारी ने बताया- दोनों ऑब्जेक्शन को खारिज किया जाता है। दोनों के नॉमिनेशन स्वीकार किए जाते हैं। इधर, फैसला आने के बाद सोलंकी के समर्थकों ने निगम के बाहर जमकर नारेबाजी की। वहीं, इस मामले को लेकर कांग्रेस मेयर पद के प्रत्याशी राजेंद्र सोलंकी ने कहा कि मेरे ऊपर आरोप लगाने वाले ये लोग पहले भी झूठे मुकदमे इन्होंने ही लगाए थे। दिनभर चले घटनाक्रम की देखें फोटो… भाजपा का ऑब्जेक्शन-सोलंकी ने एफआईआर संबंधित मामलों की जानकारी छिपाई भाजपा से प्रसन्नचंद मेहता के प्रस्तावक चैन सिंह इंदा की ओर से ऑब्जेक्शन लगाया गया था किया कांग्रेस से मेयर पद के प्रत्याशी राजेंद्र सोलंकी की ओर से मुकदमों और कोर्ट की ओर से जारी प्रसंज्ञान आदेशों के तथ्यों को छुपाया गया। ऐसे में इनका नामांकन खारिज किया जाए। वहीं कांग्रेस की ओर से ऑब्जेक्शन लगाया गया था कि प्रसन्नचंद मेहता की ओर से उनकी प्रॉपर्टी संबंधित जानकारी को छिपाया गया है। चल संपत्ति को लेकर वजन और किमत पूछी गई। ​किमत तो बता दी लेकिन उसका वजन और विवरण नहीं दिया गया। इधर, इस ऑब्जेक्शन को लेकर जवाब पेश करने खुद राजेंद्र सोलंकी पहुंचे। दोपहर 2:15 बजे इस मामले को लेकर दोनों पक्षों की सुनवाई हुई। 3:30 बजे तक दोनों पक्षों की दलीलों को सुना गया। इसके बाद रिटर्निंग अधिकारी की ओर से फैसला पेंडिंग रखा गया। शाम करीब 6 बजे रिटर्निंग अधिकारी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दोनों दलों की ओर से एक-दूसरे पर जो ऑब्जेक्शन लगाए गए थे, वह खारिज कर दिए गए है। वहीं कांग्रेस की ओर से लगे ऑब्जेक्शन को भी रिटर्निंग अधिकारी ने खारिजकर दिया था। और, दोनों के नॉमिनेशन को स्वीकार किया जाता है। फैसले से पहले निगम के बाहर जुटना शुरू हुए समर्थक, डेढ़ घंटे सोलंकी निगम में रहे इधर, ​पहले बताया गया कि पांच बजे फैसला आएगा। इस पर राजेंद्र सोलंकी बाकी कांग्रेस नेताओं के साथ 4:30 बजे निगम पहुंच गए थे। वहीं पांच बजे फैसले की सूचना मिलने की खबर उनके समर्थकों को लगी तो बड़ी संख्या में उनके समर्थक भी निगम के बाहर ​जुटना शुरू हो गए थे। इसे लेकर एहतियात के तौर पर पुलिस जाब्ता भी तैनात किया गया था। जब तक रिटर्निंग अधिकारी का फैसला नहीं आया, तब तक राजेंद्र सोलंकी कांग्रेस नेताओं के साथ निगम में ही रहे। जैसे ही ऑब्जेक्शन के खारिज करने का फैसला आया, सभी समर्थक नारेबाजी करने लगे। भाजपा की ओर से एडवोकेट मोती सिंह और कांग्रेस की ओर से एडवोकेट राजेश जोशी ने पैरवी की। सोलंकी बोले- मेरे खिलाफ 100 पेज की आपत्ति लगाई, मेरे ऊपर आरोप लगाने वाले भी ये ही इस फैसले के बाद राजेंद्र सोलंकी बोले- मेरे खिलाफ 100 पेज की आपत्ति लगाई। मेरे खिलाफ कोई मामला नहीं है, कोई आरोप तय नहीं हुआ है। केस में एफआर लग चुकी है। अधिकारियों के खिलाफ जरूर केस चल रहा है। मेरे ऊपर आरोप लगाने वाले ये ही लोग है। पहले भी झूठे मुकदमे में भी इन्होंने लगाए है। इन्हें पता है कि पेंडिंग नहीं है। वे बोले-पूरे राजस्थान में दबाव की स्थिति है। पूरी बस की बस गायब कर दी। कई लोगों को उठाकर ले जा रहे है। ऐसे कैसे लोकतंत्र बचेगा। जोधपुर और राजस्थान की जनता को आगे आना होगा। इससे पूर्व जब ऑब्जेक्शन लगाया तब उन्होंने​ भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा था-भाजपा वालों की मेहरबानी से ही मामले दर्ज हुए, जेल गया और जोधपुर से बाहर रहा हूं। पहले भी हम नहीं दबे। कांग्रेस का दावा: मामलों में एफआर लग चुकी है, शिकायत में कोई डॉक्यूमेंट पेश नहीं किया कांग्रेस के विधि विभाग के जिलाध्यक्ष दिनेश जोशी ने बताया- प्रसन्नचंद मेहता के प्रस्तावक चैन सिंह इंदा की ओर से एक एप्लीकेशन दी गई है। इसमें बताया कि राजेंद्र सोलंकी ने नॉमिनेशन में संबंधित एफआईर की जानकारी नहीं बताई है। ये आरोप निराधार है। ये आपत्ति प्रशासन के दबाव में पेश की गई है। उन्होंने बताया कि 2016 में जो एफआईआर पेश हुई थी, उसमें राज्य सरकार ने अभियोजन की स्वीकृति नहीं दी थी। इसमें एफआर लग चुकी थी और कोर्ट ने भी स्वीकार कर लिया था। जोशी ने बताया कि एक ऑब्जेक्शन प्रसन्न चंद मेहता के नॉमिनेशन को लेकर हमने पेश किया है। उन्होंने शपथ पत्र में कुछ तथ्य छिपाए हैं। मूल्यवान वस्तुओं का न तो नाम बताया गया और न ही इनके वजन आदि की जानकारी। इस आधार पर हमने ​नॉमिनेशन निरस्त करने की अपील की है। राजेंद्र सोलंकी के केस में एफआर लग चुकी वहीं कांग्रेस विधि विभाग के उपाध्ययक्ष अनिल गौड़ ने बताया- राजेंद्र सोलंकी की ओर से शपथ पत्र में जो तथ्य दिए थे, वे बिल्कुल सही है। जिस एफआईआर का जिक्र किया जा रहा है, उसमें एफआर लगा दी थी। इतना ही नहीं भाजपा की ओर से जो शिकायत दी है, उसमें किसी तरह का कोई डॉक्यूमेंट नहीं दिया गया है। केवल दबाव के लिए ये किया गया है, ताकि शिकायत के माध्यम से फॉर्म रिजेक्ट हो जाए। भाजपा का दावा: सोलंकी के खिलाफ चल रहे मामलों की जानकारी नहीं दी वहीं इस मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल ने बताया कि राजेंद्र सोलंकी की ओर से जो फॉर्म पेश गिया गया था, उसमें उनके खिलाफ केस निल बताए गए। इसलिए हमने ऑब्जेशक्शन लगाया है। वहीं, कांग्रेस की ओर से प्रसन्नचंद मेहता के लगाए ऑब्जेक्शन को लेकर वे बोले- शपथ पत्र में केवल मूल्यवान राशि ही होती है। उसकी जानकारी उस नॉमिनेशन फॉर्म में लिखी है।