जोधपुर नगर निगम में प्रसन्नचंद मेहता मेयर निर्वाचित हुए हैं। भाजपा के पास 51 का बहुमत था, लेकिन मेहता को 52 वोट मिले। प्रसन्नचंद मेहता पिछले 49 साल से संगठन में कार्यकर्ता के तौर पर जुड़े हुए हैं। पहली बार उन्हें इतना बड़ा पद मिला है। उनकी शुरुआत एबीवीपी के साथ हुई। इसके साथ ही वे संघ में कार्यकर्ता रहे। वे संघ के भी करीबी माने जाते हैं। पढ़िए जोधपुर के नए मेयर के बारे में… साल 1977 से एबीवीपी से शुरुआत, संघ में कार्यकर्ता रहे प्रसन्नचंद मेहता पिछले 49 साल से संगठन से जुड़े हुए हैं। संघ में वे स्वयंसेवक और कार्यकर्ता के तौर पर सक्रिय रहे हैं। इससे पहले साल 1977 में उन्होंने एबीवीपी से शुरुआत की। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में वे सक्रिय भूमिका में रहे। यहीं से उनकी संघ और संगठन में भागीदारी बढ़ती गई। जब भारतीय जनता युवा मोर्चा की शुरुआत की तो प्रसन्नचंद मेहता भी जुड़ गए। इस दौरान वे जोधपुर भाजयुमो के पहले जिलाध्यक्ष बने। इसी के साथ सक्रिय राजनीति में उनकी एंट्री हुई। जोधपुर के युवाओं को भाजयुमो से जोड़ने का काम किया। घर-घर जाकर संगठन को लेकर चर्चा की। साथ ही बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ताओं को जोड़ा। इस भागीदारी को देखते हुए 90 के दशक में उन्हें भाजपा जिलाध्यक्ष की कमान सौंपी गई। जिलाध्यक्ष और प्रदेश उपाध्यक्ष पद भी रहे, कई शहरों में संभाल चुके चुनावी कमान प्रसन्नचंद मेहता भाजपा जिलाध्यक्ष और प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर भी रह चुके हैं। जब सतीश पूनिया प्रदेशाध्यक्ष थे, तब मेहता प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर रहे। वे पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के करीबी माने जाते हैं। संघ में सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर वे लगातार सक्रिय रहे। इसी का नतीजा है कि वे संघ के भी करीबी हैं। संगठन से लेकर पार्टी तक के पदाधिकारियों की वे पहली पसंद बने। इसके अलावा विधानसभा, लोकसभा और निकाय चुनाव में भी वे कई शहरों के प्रभारी रहे और चुनावी कमान को संभाला।