अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के मौके पर बधिर लोगों के अधिकारों और आसान बातचीत की व्यवस्था के लिए बुधवार को करौली कलेक्टर के नाम एसडीएम को एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस-न्याय व्यवस्था, सरकारी सेवाओं, रोजगार और इमरजेंसी सूचनाओं में भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) की सुविधा देने की मांग की गई। बधिर लोगों ने कहा कि सांकेतिक भाषा कोई समस्या नहीं है, बल्कि सांकेतिक भाषा तक पहुंच की कमी से बातचीत में रुकावट आती है। उन्होंने बधिर छात्रों के लिए ISL जानने वाले शिक्षकों और आसान पढ़ाई का सामान उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही, शिक्षकों को ISL की ट्रेनिंग देने या स्कूलों में योग्य ISL इंटरप्रेटर रखने की बात भी कही गई। बधिर लोगों ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों से बातचीत के लिए ISL इंटरप्रेटर का इंतजाम करने की मांग की। इसके अलावा, पुलिस थानों और अदालतों में भी इंटरप्रेटर उपलब्ध कराने की मांग रखी गई। ज्ञापन में सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक सेवाओं की जरूरी जानकारी ISL और आसान तरीकों से उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल थी। इसमें रोजगार, ट्रेनिंग और प्रमोशन में समान अवसर देने, परिवार और समाज में बधिरता के बारे में जागरूकता बढ़ाने, साथ ही इमरजेंसी घोषणाओं और जरूरी सूचनाओं को ISL में आसान बनाने की मांग भी की गई। बधिर लोगों ने संदेश दिया कि “हम बधिर हैं, हम सक्षम हैं और हमारी अपनी भाषा है।” उन्होंने सांकेतिक भाषा सीखने और उसका उपयोग बढ़ाने के साथ ही बधिर लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय, रोजगार और बातचीत में समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की।