श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें शहीदी वर्ष के अवसर पर जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। श्री गुरु गोबिंद सिंह चेयर फॉर नेशनल इंटीग्रेशन एंड सिख स्टडीज और भारतीय अभ्युत्थान समिति के संयुक्त तत्वावधान में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल मुख्य वक्ता रहे। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजस्थान रुपिंदर सिंह आईपीएस मुख्य अतिथि और राजस्थान विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। डॉ. कृष्ण गोपाल ने गुरु तेग बहादुर साहिब के जीवन, संघर्ष और बलिदान पर कहा- उनकी शहादत केवल सिख समाज के इतिहास की महत्वपूर्ण घटना नहीं है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता, मानवीय मूल्यों और अन्याय के सामने निर्भय होकर खड़े होने की प्रेरणा देती है। सिद्धांतों और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए किया संघर्ष डॉ. कृष्ण गोपाल ने मुगल शासन और औरंगजेब के दौर का उल्लेख करते हुए कहा- उस समय धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर गंभीर परिस्थितियां थीं। ऐसे दौर में गुरु तेग बहादुर साहिब ने धार्मिक दबाव और अन्याय के सामने झुकने के बजाय अपने सिद्धांतों और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उनका जीवन यह संदेश देता है कि किसी भी व्यक्ति को उसकी आस्था और धार्मिक विश्वास के कारण दबाया नहीं जाना चाहिए। डॉ. कृष्ण गोपाल ने गुरु तेग बहादुर साहिब की शहादत को भारत की उस परंपरा का प्रतीक बताया। इसमें अपने अधिकारों के साथ-साथ दूसरों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा को भी महत्वपूर्ण माना गया है। कार्यक्रम में गुरु साहिब के जीवन, संघर्ष और तत्कालीन सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी विचार-विमर्श हुआ।