बाड़मेर जिले में इन दिनों मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। मानसून की बेरुखी और अचानक बढ़ी गर्मी ने आमजन से लेकर किसानों तक की चिंता बढ़ा दी है। हालात यह हैं कि पिछले 2-3 दिनों में पारा अचानक उछाल मारते हुए 39.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। सितंबर के महीने में लोगों को मई जैसी भीषण गर्मी और उमस का अहसास हो रहा है। वहीं, औसत से 40 फीसदी कम बारिश और इस महीने बारिश की कोई संभावना नहीं होने से खेतों में खड़ी फसलें अब झुलसकर जलने लगी हैं। पारा 40 के करीब, रात में भी उमस का टॉर्चर: जिले में बीते कुछ दिनों से अचानक तेज गर्मी का दौर शुरू हो गया है। सोमवार को बाड़मेर का अधिकतम तापमान 39.5 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। किसानों की उम्मीदें टूटी, जल रही हैं फसलें जिले में अब तक औसत से करीब 40 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। सीजन की शुरुआत में हुई हल्की बारिश के भरोसे किसानों ने खेतों में बुवाई तो कर दी थी, लेकिन अब बारिश का लंबा ब्रेक और लगातार बढ़ते तापमान ने फसलों को बर्बाद करना शुरू कर दिया है। खेतों में मूंग, मोठ, बाजरा और ग्वार जैसी खरीफ की फसलें गर्मी की तपिश में जल रही हैं। इस महीने अब तक 250 एमएम तक ही बारिश हुई है, जबकि औसत बारिश का आंकड़ा 387 एमएम है। आगे क्या: इस महीने राहत की उम्मीद नहीं मौसम के मौजूदा पूर्वानुमान के अनुसार फिलहाल इस पूरे महीने बारिश की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। पश्चिमी राजस्थान में कोई मजबूत वेदर सिस्टम एक्टिव नहीं है। अगर आगामी दिनों में भी मौसम का यही रूखापन जारी रहा, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है और जिले में चारे-पानी का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।