सेंट्रल जेल में कैदियों के पास मोबाइल मिलने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। इससे जेल प्रशासन की कार्यशैली पर भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं। कैदियों ने सलाखों के पीछे रहते हुए भी कम्युनिकेशन की इतनी मजबूत सुरंग बना ली है कि जेल प्रशासन इसे बंद करने में असमर्थ नजर आ रहा है। कैदियों तक आसानी से मोबाइल पहुंच रहे हैं और वे इनका इस्तेमाल भी कर रहे हैं। इसी क्रम में बुधवार को रूटीन चेकिंग के दौरान एक कैदी से कीपैड मोबाइल और उसकी चार्जिंग केबल बरामद हुई। वह कब से मोबाइल इस्तेमाल कर रहा था, इसका खुलासा पुलिस जांच के बाद ही होगा। 9 दिन पहले भी एक कैदी के पास से मोबाइल मिला था। पुलिस के अनुसार, जेल प्रहरी लक्ष्मणराम जाट ने रिपोर्ट दी कि गत 23 सितंबर को जेल की तलाशी ली जा रही थी। इसी दौरान जुवेनाइल वार्ड नंबर 18 में कैदियों की गतिविधि संदिग्ध दिखी। वहां कैदियों की तलाशी ली गई, जिसमें सवाई माधोपुर निवासी कैदी विक्रम सिंह शेखावत से एक कीपैड मोबाइल बरामद किया गया। उसने बगल में मोबाइल छिपाया हुआ था और साथ में चार्जिंग केबल भी लगी थी। जेल स्टाफ ने मोबाइल व केबल जब्त कर लिए। सूरजपोल थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है। टी-एचसीबीएस टावर 8 माह पहले लगा, लेकिन शुरू नहीं सेंट्रल जेल में कैदियों के चोरी-छिपे मोबाइल चलाने पर रोक लगाने के लिए इसी साल जनवरी में टी-एचसीबीएस (टावर ऑफ हार्मोनी कॉल ब्लॉकिंग सिस्टम) लगाया गया था। दावा किया गया था कि 30 मीटर ऊंचे इस टावर से जेल के अंदर 2जी से 5जी तक के सभी मोबाइल नेटवर्क नहीं चल पाएंगे। लेकिन, यह शोपीस बना हुआ है। फरवरी में मोबाइल नेटवर्क कंपनियों को इस पर सिग्नल-ब्लॉकिंग सिस्टम लगाना था, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका। ऐसे में कैदियों तक मोबाइल पहुंच भी रहे हैं और वे आसानी से चला रहे हैं। हिस्ट्रीशीटर से मिला था मोबाइल सूरजपोल थाना पुलिस ने गत 15 सितंबर को जेल का निरीक्षण किया था। तब वहां बंद हिस्ट्रीशीटर नरेश वाल्मिकी के बैरक से एक मोबाइल बरामद किया था। वहीं जली हुई सिगरेट, बीड़ियां और इनके रैपर भी पड़े मिले थे। बैरक से कुछ दूर एक इंडक्शन भी मिला था।