ऐतिहासिक डोल मेले के रंगमंच पर शुक्रवार की रात लोक संस्कृति, राजस्थानी रंग और बॉलीवुड धुनों का ऐसा संगम देखने को मिला कि पूरा पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अनंत इवेंट की सांस्कृतिक संध्या में नॉनस्टॉप चित्रहार की प्रस्तुतियों ने मेलार्थियों को देर रात तक बांधे रखा। कभी बॉलीवुड गीतों की धुन पर कदम थिरके तो कभी राजस्थानी लोक रंग ने दर्शकों को अपनी ओर खींच लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद ग्रुप के एंकर चेतन शर्मा ने देवा ओ देवा, गणपति देवा की स्तुति के साथ सांस्कृतिक संध्या को आगे बढ़ाया। जैसे ही मंच पर कलाकारों ने कदम रखाए दर्शकों में उत्साह की लहर दौड़ गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी छबड़ा की नृत्यांगनाओं ने पारंपरिक अंदाज में विद्युत गति से लोक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों का दिल जीत लिया। उनकी लय, ताल और भाव.भंगिमाओं ने ऐसा समां बांधा कि दर्शक तालियां बजाने और झूमने से खुद को रोक नहीं सके। कार्यक्रम में एक दर्जन से अधिक कलाकारों ने अलग-अलग अंदाज में प्रस्तुतियां देकर मंच को जीवंत कर दिया। बॉलीवुड गीतों की श्रृंखला में जब राजस्थानी तड़का लगा तो मेले की शाम और भी रंगीन हो उठी। नृत्यांगना किस्मत ने बूंदी का दरवाजा पे मंड रही मोरनी, गीत पर आकर्षक प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। राजस्थानी लोकधुन और नृत्य की थिरकन ने माहौल में ऐसा रंग घोला कि पूरा पांडाल तालियों से गूंज उठा। वहीं जासमीन और सलमा ने अपनी सुरीली आवाज में राजस्थानी गीतों की झड़ी लगाकर हाड़ौती और राजस्थान की लोक परंपरा को मंच पर जीवंत करने का प्रयास किया। कार्यक्रम के दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से भी माकूल सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था बनाए रखी गई। कार्यक्रम के प्रारंभ में डोल मेला अध्यक्ष नीरज नागर ने सभी कलाकारों सहित अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। रंग मंच पर आज: डोल मेला अध्यक्ष नागर ने बताया कि रविवार की रात रंगमंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें दिल्ली की रशियन नृत्यांगना वैशाली भदौरिया अपने ग्रुप के कलाकारों के साथ विशेष प्रस्तुति देंगी।