नगर परिषद चुनाव में इस बार 60 वार्डों में 100 महिला प्रत्याशी मैदान में हैं। भाजपा ने 9 और कांग्रेस ने 18 महिलाओं को टिकट दिया है, जबकि बड़ी संख्या में महिलाएं निर्दलीय भी चुनाव लड़ रही हैं। महिला प्रत्याशियों के प्रचार में उनके पति, पिता, भाई, ससुर और परिवार के दूसरे सदस्य भी सक्रिय हैं। कई जगह परिवार के लोग घर-घर जाकर वोट मांग रहे हैं और प्रचार की व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं, वहीं कई महिला प्रत्याशी खुद भी मतदाताओं से संपर्क कर अपने वार्ड की समस्याओं और विकास को लेकर अपनी बात रख रही हैं। चुनावी पोस्टरों में भी महिला प्रत्याशियों के साथ परिवार के सदस्यों की तस्वीरें नजर आ रही हैं। ऐसे में इस चुनाव में महिला भागीदारी के साथ यह भी देखने वाली बात होगी कि कितनी महिलाएं जीतकर नगर परिषद पहुंचती हैं और वहां अपने स्तर पर कितनी सक्रिय भूमिका निभाती हैं। पोस्टरों में प्रत्याशी के साथ परिवार की तस्वीरें कई वार्डों में लगे चुनावी पोस्टर और बैनर में महिला प्रत्याशी के साथ उनके पति और परिवार के दूसरे सदस्यों की तस्वीरें भी दिखाई दे रही हैं। कुछ पोस्टरों में महिला प्रत्याशी की फोटो के साथ परिवार के पुरुष सदस्यों की तस्वीरें बड़ी हैं, जबकि कुछ पोस्टरों में महिला प्रत्याशी की फोटो प्रमुखता से लगाई गई है। यह प्रत्याशियों के प्रचार का अलग-अलग तरीका है। कुछ जगह महिला प्रत्याशी घूंघट या बुर्के में भी पोस्टर पर दिखाई दे रही हैं। कई महिला प्रत्याशी खुद भी कर रहीं प्रचार चुनाव प्रचार के दौरान कई महिला प्रत्याशी खुद मतदाताओं से संपर्क करती दिखाई दे रही हैं। वे घर-घर जाकर लोगों से मिल रही हैं, अपने वार्ड की समस्याओं और विकास को लेकर अपनी बात रख रही हैं। चुनावी बैठकों में भी कुछ महिला प्रत्याशी खुद संबोधित कर रही हैं। वहीं कई प्रत्याशियों के प्रचार में परिवार के सदस्य भी उनके साथ लगातार जुटे हुए हैं। महिला आरक्षण से बढ़ी राजनीतिक भागीदारी नगर निकायों में महिला आरक्षण के चलते बड़ी संख्या में महिलाओं को चुनाव लड़ने का अवसर मिल रहा है। इसका असर इस चुनाव में भी दिखाई दे रहा है। 60 वार्डों में 100 महिलाओं का चुनाव मैदान में उतरना राजनीतिक भागीदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अब चुनाव परिणाम के बाद यह देखना होगा कि इनमें से कितनी महिलाएं जीतकर नगर परिषद पहुंचती हैं। निवर्तमान सभापति नगमा बानो की सक्रियता भी चर्चा में नगर परिषद की निवर्तमान सभापति नगमा बानो इस चुनाव में अब तक सक्रिय प्रचार में नजर नहीं आई हैं। चुनावी गतिविधियों के बीच उनकी सीमित मौजूदगी भी चर्चा में है। हालांकि चुनाव प्रचार को लेकर उनकी रणनीति और भूमिका चुनाव के आगे के दिनों में स्पष्ट हो सकती है। समाजशास्त्री बोले- महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ना सकारात्मक समाजशास्त्री डॉ. सुशील त्यागी कहते हैं कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना सकारात्मक बदलाव है। महिला आरक्षण ने महिलाओं को चुनाव लड़ने और स्थानीय निकायों में प्रतिनिधित्व का अवसर दिया है। उनके अनुसार चुनाव जीतने के बाद महिलाओं का अपने वार्ड की समस्याओं, विकास कार्यों और नगर परिषद की बैठकों में सक्रिय रूप से भाग लेना भी महत्वपूर्ण है। इससे स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी और प्रभाव दोनों मजबूत होंगे। चुनाव में परिवार की भूमिका भी अहम चुनाव किसी भी प्रत्याशी के लिए सामूहिक प्रयास होता है। पुरुष प्रत्याशियों की तरह महिला प्रत्याशियों के प्रचार में भी परिवार के लोग सक्रिय रहते हैं। इसलिए केवल परिवार के सदस्यों के प्रचार में शामिल होने को महिला प्रत्याशी की स्वतंत्रता या नेतृत्व से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। इस चुनाव की खास बात यह है कि बड़ी संख्या में महिलाएं खुद भी चुनाव मैदान में उतरी हैं और अपने स्तर पर मतदाताओं के बीच पहुंच रही हैं।