पाली में एक दिन की बेटी को परिजन हॉस्पिटल में भर्ती करवाकर चले गए। तीन दिन बाद बच्ची की मौत हो गई। हॉस्पिटल स्टाफ ने परिजनों को फोन करके बताया, लेकिन वे शव लेने नहीं आए। इसके बाद पुलिस ने परिजनों का पता लगाया और उन्हें बच्ची की बॉडी ले जाने के लिए कहा। तब शनिवार (24 अक्टूबर) को खेत मालिक के साथ मासूम के माता-पिता पाली के बांगड़ हॉस्पिटल पहुंचे और बच्ची की बॉडी लेकर गए। परिजनों ने बताया कि उनके दो बेटे और हैं। वे खेत पर अकेले थे, इसलिए हॉस्पिटल से चले गए थे। मामला बांगड़ हॉस्पिटल का है। बच्ची की प्रीमैच्योर डिलीवरी हुई थी। मासूम की हालत देखकर एनआईसीयू में तैनात नर्सिंग ऑफिसर सोनू कुमारी सैन भी रो पड़ीं। उन्होंने कहा- मैंने अपने कार्यकाल में पहली बार ऐसा मामला देखा, जिसमें परिजन बच्ची को हॉस्पिटल में छोड़कर चले गए और मौत के बाद भी उसे लेने नहीं आए। नवजात की मौत के बाद उसकी बॉडी हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में रखवाई गई थी। पुलिस और हॉस्पिटल प्रशासन परिजनों के आने का इंतजार कर रहा था। 7वें महीने में घर पर ही हुई थी डिलीवरी उदयपुर जिले के सायरा क्षेत्र का रहने वाला परिवार फालना थाना क्षेत्र में एक कृषि कुएं पर काम करता है और वहीं रहता है। परिवार की महिला की 20 अक्टूबर को घर पर ही 7वें महीने में प्रीमैच्योर डिलीवरी हुई थी। बच्ची का जन्म सातवें महीने में होने के कारण वह बहुत कमजोर थी। उसका वजन एक किलो से भी कम था। परिजन उसे पहले स्थानीय हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां से हालत गंभीर होने पर पाली के बांगड़ हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। यहां दोपहर करीब 12:30 बजे उसे नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भर्ती किया गया। इसके बाद परिजन स्टाफ को बिना जानकारी दिए घर चले गए। कुछ देर बाद भूख से रो रही बच्ची को दूध पिलाने के लिए स्टाफ ने उसकी मां को तलाशा तो वह नहीं मिली। फोन पर संपर्क करने पर परिजनों ने बताया कि वे घर आ गए हैं। एनआईसीयू में तैनात नर्सिंग ऑफिसर सोनू कुमारी सैन ने दूसरी महिला का दूध पिलाकर नवजात की देखभाल की। स्टाफ ने भी अपनी ओर से मासूम को बचाने की कोशिश जारी रखी। लेकिन 22 अक्टूबर की रात करीब 10:30 बजे इलाज के दौरान नवजात की मौत हो गई। इसके बाद भी परिजन बच्ची का शव लेने नहीं आए। हॉस्पिटल स्टाफ और पुलिसकर्मियों ने फोन करके मौत की सूचना दी, लेकिन वे नहीं पहुंचे। इसके बाद नवजात की बॉडी हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में रखवाई गई। डॉक्टर बोले- बेहद कमजोर था नवजात ड्यूटी पर तैनात रेजिडेंट डॉक्टर माणिक हरकटे ने बताया- नवजात को हॉस्पिटल लाया गया, तब उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी। उसका वजन एक किलो से भी कम था और फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हुए थे। इसी वजह से उसकी हालत बेहद गंभीर थी। डॉक्टरों और वार्ड स्टाफ ने उपचार के साथ उसकी देखभाल की। लेकिन बच्ची को बचाया नहीं जा सका। अधीक्षक बोले- कॉल करने पर भी परिजन नहीं आए बांगड़ हॉस्पिटल के कार्यवाहक अधीक्षक डॉ. आरके विश्नोई ने कहा- मासूम को भर्ती करवाने के बाद परिजन बिना बताए चले गए। नवजात की मौत होने पर भी उन्हें कॉल किया, लेकिन वे नहीं आए। हमने पुलिस को भी इसकी जानकारी दे दी थी। पुलिसकर्मियों ने भी उन्हें कॉल किया। इसके बाद नवजात की बॉडी मॉर्च्युरी में रखवाई गई थी। परिजन नहीं आते तो हॉस्पिटल स्टाफ नवजात का अंतिम संस्कार करता। SHO बोले- फालना थाना पुलिस को दी जानकारी कोतवाली थाने के SHO रविन्द्र सिंह खिंची ने बताया- हॉस्पिटल से सूचना मिलने पर नवजात के परिजनों का पता लगाया गया। इसके बाद फालना थाना पुलिस को उनके मोबाइल नंबर और अन्य जानकारी दी गई। स्थानीय पुलिस ने अपने स्तर पर परिजनों का पता लगाया और उन्हें बच्ची की बॉडी ले जाने के लिए कहा। इसके बाद शनिवार को खेत मालिक के साथ नवजात के माता-पिता बांगड़ हॉस्पिटल पहुंचे और बॉडी लेकर गए, ताकि उसका अंतिम संस्कार कर सकें। परिजनों ने बताया कि उनके दो बेटे और हैं। वे खेत पर अकेले थे, इसलिए बच्ची को हॉस्पिटल में भर्ती करवाने के बाद वहां से चले गए थे। --- यह भी पढ़े - 1-दिन की बेटी को हॉस्पिटल के NICU में छोड़ गए:नर्सिंग स्टाफ ने दूसरी महिला का दूध पिलाया, 3 दिन बाद मौत, शव लेने नहीं आए परिजन पाली में एक दिन की बेटी को परिजन हॉस्पिटल में भर्ती करवा कर चले गए। तीन दिन बाद बच्ची की मौत हो गई। हॉस्पिटल स्टाफ ने परिजनों को फोन करके बताया, लेकिन वे शव लेने नहीं आए। पूरी खबर पढ़िए