उदयपुर नगर निगम में भाजपा के मेयर प्रत्याशी पारस सिंघवी (62) पांचवी बार पार्षद हैं। छात्रसंघ से राजनीति की शुरुआत करने वाले पारस का इस बार मेयर बनना तय माना जा रहा है। नगर निगम के पिछले बोर्ड में वे डिप्टी मेयर रह चुके हैं। भाजपा संगठन में सक्रिय रहने के साथ व्यापारिक संगठनों में भी उनकी पहचान है। 2026 के नगर निगम चुनाव में 11 सितंबर को वार्ड 24 से जीत दर्ज करने के बाद सिंघवी का नाम उदयपुर के नए मेयर के लिए घोषित हुआ है। उन्होंने नामांकन भी दाखिल कर दिया है। भाजपा ने नगर निगम के 80 में से 53 वार्ड जीते हैं। ऐसे में पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत है। मेयर के लिए चुनाव 21 सितंबर को होना है। सिंघवी इस बार 1680 वोट से जीते मेयर पद की दावेदारी के बीच सिंघवी ने वार्ड 24 से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और 2449 वोट हासिल किए। कांग्रेस की दीपिका कुमावत को 769 वोट मिले। इस तरह सिंघवी 1680 वोट के अंतर से विजयी रहे। उप महापौर से मेयर की दावेदारी तक सिंघवी का नगर निगम से पुराना रिश्ता है। 2019 के निकाय चुनाव के बाद भाजपा का बोर्ड बनने पर गोविंद सिंह टांक महापौर बने और पारस सिंघवी को उपमहापौर की जिम्मेदारी मिली। उपमहापौर के तौर पर वे निगम की बैठकों और शहर से जुड़े विकास कार्यों में लगातार सक्रिय रहे। इस बार पांचवीं बार पार्षद बने सिंघवी विवादों से भी नाता रहा सिंघवी के राजनीतिक सफर में 2023 का विधानसभा चुनाव भी अहम मोड़ था। उदयपुर शहर विधानसभा सीट से भाजपा टिकट के लिए उन्होंने दावेदारी की थी, लेकिन पार्टी ने ताराचंद जैन को प्रत्याशी बनाया। 21 अक्टूबर 2023 को सिंघवी ने खुलकर विरोध किया है। वे कार्यकर्ताओं के बीच इमोशनल हो गए। कहा कि पार्टी फिर से विचार करे, नहीं तो अब आर-पार की लड़ाई लड़नी होगी। पारस ने तब गुलाब चंद कटारिया को भी निशाने पर लिया था। नवंबर 2024 में सिंघवी ने उप महापौर की कुर्सी भी छोड़ दी। उन्होंने कहा था कि मेरा कार्यकाल पूरा हो चुका है, लेकिन परदे के पीछे की कहानी आंतरिक लड़ाई की थी। ओम माथुर के नजदीक है सिंघवी सिंघवी सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर के नजदीक हैं। इसके साथ ही वे इस समय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के भी बहुत करीबी हैं। जब से गजपाल सिंह राठौड़ उदयपुर शहर जिला भाजपा के अध्यक्ष बने तब से वे राठौड़ के साथ थे। गजपाल के साथ तीन लोगों की जोड़ी में दो चेहरे प्रमोद सामर और पारस सिंघवी ही थे। कुछ समय से इसमें पारस सिंघवी ज्यादा करीबी हो गए। लखनऊ से अयोध्या पैदल पहुंचे सिंघवी 10 मई 1964 को जन्मे सिंघवी शुरू से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे एवं संघ शिक्षा में द्वितीय वर्ष शिक्षित हैं। 1987 में श्रमजीवी महाविद्यालय में छात्रसंघ से अध्यक्ष रहे। पिछले 40 वर्षों से लगातार भारतीय जनसंघ एवं भारतीय जनता पार्टी से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। वे 1996 में भाजपा, युवा मोर्चा उदयपुर के जिलाध्यक्ष रहे एवं 1999 में भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री रहे। राम मंदिर आंदोलन में लखनऊ शहर से पैदल यात्रा कर अयोध्या पहुंचे। सिंघवी वर्ष 2007 में नगर विकास प्रन्यास उदयपुर का ट्रस्टी भी बनाया। ट्रेवल्स, होटल कारोबारी हैं सिंघवी सिंघवी का ट्रेवल्स और होटल का व्यवसाय है। उदयपुर में उनकी पारस होटल और पारस ट्रेवेल्स के नाम से बसें चलती हैं। सिंघवी उदयपुर चेम्बर आफ कॉमर्स उदयपुर डिवीजन के छठी बार अध्यक्ष है। वे दिगम्बर जैन नरसिंहपुरा समाज के अध्यक्ष भी है।
बहुमत भाजपा का पर कांग्रेस का भी उम्मीदवार मेदान में वैसे उदयपुर में भाजपा ने बहुमत प्राप्त किया है। यहां पर 80 वार्ड में से भाजपा ने 53, कांग्रेस ने 23 और 4 अन्य ने चुनाव जीता है। बहुमत के लिए 41 का नंबर भाजपा के पास है। इसके बावजूद मेयर पद के लिए कांग्रेस ने नामांकन करा कर चुनावी मुकाबला बना दिया। कांग्रेस उम्मीदवार पूनम कुंवर 2014 में लड़ चुकी चुनाव उदयपुर नगर निगम में मेयर पद के लिए कांग्रेस से डा. पूमन कुंवर राठौड़ ने नामांकन दाखिल किया। पूनम राजनीति में 2014 से सक्रिय है। उनके पति फतह सिंह राठौड़ शहर कांग्रेस के अध्यक्ष है। राठौड़ का वार्ड महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो गया तो उनकी पत्नी डा. पूनम कुंवर को वार्ड 17 से टिकट के नाम पर दावेदारी की। इसके साथ ही कांग्रेस की सूची में पूनम कुंवर को पार्टी ने टिकट दे दिया। 50 वर्षीय पूनम राठौड़ हाउस वाइफ है। पीएचईडी कर चुकी डा. पूनम ने उदयपुर नगर निगम से 2014 में भी पार्षद का चुनाव लड़ा था। तब उन्होंने वार्ड नंबर 51 से चुनाव लड़ा था और वे हार गई थी। पूनम 505 वोट से चुनाव जीतीं इस बार के चुनाव में वार्ड 17 में पूनम को 2099 वोट मिले तो उनके सामने भाजपा की मीना चौहान को 1594 वोट मिले थे। पूनम 505 वोट से चुनाव जीत गई।