बीकानेर के पीबीएम अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर एक और मामला सामने आया है। अस्पताल के दिवंगत अटेंडेंट मजीदन के परिजनों को कोर्ट द्वारा निर्धारित लाभ-परिलाभ की राशि नहीं दिए जाने के मामले में पीबीएम अस्पताल अधीक्षक के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई शुरू की गई है। ये मामला तत्कालीन अधीक्षक का है, जिनके कार्यकाल में अदालती आदेश की पालना नहीं की गई। मामले के अनुसार, मजीदन पीबीएम हॉस्पिटल में अटेंडेंट के पद पर कार्यरत थे। सेवाकाल के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनके पुत्र मोहम्मद रमजान ने अपने पिता के वेतन एवं अन्य लाभ-परिलाभ की राशि दिलाने के लिए पीबीएम अधीक्षक के समक्ष प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया था। दस्तावेज के अनुसार, जिला एवं सेशन कोर्ट ने 19 अक्टूबर 2024 को पीबीएम अधीक्षक को आदेश जारी किया था। आदेश में मजीदन की लाभ-परिलाभ की राशि 11,28,692 रुपए मोहम्मद रमजान को नियत अवधि में अदा करने के निर्देश दिए गए थे। 2 साल से आदेश की पालना नहीं होने का आरोप आरोप है कि कोर्ट के आदेश की प्रति पीबीएम अधीक्षक के कार्यालय में प्रस्तुत किए जाने के बावजूद करीब दो वर्ष से आदेश की पालना नहीं हुई। दस्तावेज में यह भी उल्लेख है कि कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा मोहम्मद रमजान से कथित रूप से कहा गया कि वे किसी कोर्ट के आदेश को नहीं मानते। इसके बाद मोहम्मद रमजान ने वकील वसीम मकसूद के माध्यम से पीबीएम अस्पताल अधीक्षक के विरुद्ध कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई शुरू करवाई है। दस्तावेज के मुताबिक कोर्ट की ओर से पीबीएम अधीक्षक को अवमानना का नोटिस जारी करने के आदेश भी किए जा चुके हैं। हालांकि ये मामला वर्तमान अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया से जुड़ा नहीं है, बल्कि तत्कालीन अधीक्षक का है।