जालोर पहुंचने पर नाथ संप्रदाय के संत सिरे मंदिर धाम और भैरूनाथ अखाड़ा के पीठाधीश्वर पीर गंगानाथ महाराज का जोरदार स्वागत किया गया। वे 54 दिन का चातुर्मास पूरा कर नजदीकी गांव बैरठ के केसरनाथ मंदिर (अखण्ड धूणे) से गुरुवार सुबह 8 बजे जालोर के भैरूनाथ अखाड़े के लिए रवाना हुए। गाजे-बाजे और भव्य शोभायात्रा के साथ जालोर में उनका प्रवेश हुआ। भैरूनाथ अखाड़ा पहुंचने पर उनका स्वागत किया गया। सामेला और पूजा-अर्चना हुई अखाड़े के व्यवस्थापक पारसमल परमार ने बताया- शोभायात्रा के भैरूनाथ अखाड़ा पहुंचने पर लाभार्थी परिवार की महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ सामेला की रस्म अदा की। इसके बाद लाभार्थी परिवार ने मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और पीर गंगानाथ महाराज को फूलमाला पहनाकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान भक्तों ने जयनाथजी के गगन भेदी जयकारे लगाए। शोभायात्रा में घोड़े, रथ और बैंड शोभायात्रा में सुसज्जित घोड़े, भव्य रथ, विभिन्न बैंड-बाजे और ढोल-धमाके की थाप ने लोगों को आकर्षित किया। रास्ते भर में कई स्थानों पर शहरवासियों ने फूल बरसाकर पीर गंगानाथ महाराज का स्वागत किया। इस दौरान भैसवाड़ा व लेटा महंत रणछोड़ भारती महाराज, मलकेश्वर मठ के महंत सेवा भारती महाराज, धुणिया मठ के महंत सोमपुरी महाराज, जागनाथ मंदिर के महंत महेंद्र भारती महाराज, गोल मठ के महंत आशा भारती महाराज, सरत मठ के महंत शंकर स्वरूप महाराज, सांथू महंत रणछोड़ पुरी महाराज मौजूद रहे। साथ ही मुंडेश्वर महादेव के महंत बद्रीनाथ महाराज, साफाड़ा महंत सोमनाथ महाराज, हल्देश्वर मठ के महंत मोहननाथ, झरणेश्वर महादेव महंत साईनाथ महाराज, उदयपुर के रेवतीनाथ महाराज, भैरूनाथ अखाड़ा के योगी प्रेमनाथ महाराज, योगी आनंदनाथ महाराज, योगी ईश्वरनाथ महाराज, योगी शेरनाथ महाराज, योगी गोपालनाथ महाराज, योगी निर्भयनाथ महाराज एवं समस्त रमताराम साधु-महात्मा उपस्थित हुए। चढ़ावा लाभार्थियों का चातुर्मास सेवा समिति द्वारा बहुमान समारोह के चढ़ावा लाभार्थी दीपाराम सुथार, अरविंद पणिया, प्रेमाराम देवासी रणछोड़ नगर का चातुर्मास सेवा समिति ने अभिनंदन किया। बैरठ गांव के कानसिंह मण्डलावत, पूर्व डीवाईएसपी गोपालसिंह का माला पहनाकर बहुमान किया। पीर गंगानाथ महाराज गत 1 अगस्त को जालोर के भैरूनाथ अखाड़े से भव्य शोभायात्रा के साथ बैरठ गांव स्थित केसरनाथ मंदिर के लिए रवाना हुए थे। वहां उन्होंने 54 दिनों तक तपस्या और साधना की। इस दौरान बैरठ गांव में रोजाना सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं और साधु-संतों का तांता लगा।