ऊर्जा विभाग में एक और सलाहकार की नियुक्ति को लेकर हलचल तेज हो गई है। इस बार ऊर्जा सलाहकार की बजाय सिविल इंजीनियरिंग के टेक्नोक्रेट को जिम्मेदारी देने की तैयारी है। पीडब्ल्यूडी के सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता (एसई) एसपी गुप्ता की नियुक्ति को लेकर करीब एक महीने से कवायद चल रही है। उन्हें एडवाइजर-कम-ओएसडी की जिम्मेदारी देकर सिविल प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग का जिम्मा दिए जाने की चर्चा है। कोटा क्षेत्र से जुड़े प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग के लिए भी लगाए जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि प्रस्ताव अभी उच्च स्तर पर विचाराधीन है। नियुक्ति का अंतिम आदेश जारी होने के बाद ही पद, अधिकार और जिम्मेदारी स्पष्ट होगी। ऊर्जा विभाग का मुख्य काम बिजली उत्पादन, प्रसारण, वितरण, सब-स्टेशन, लाइन नेटवर्क, मीटरिंग और तकनीकी परियोजनाओं से जुड़ा है। विभाग और उसकी कंपनियों में सिविल कार्यों के लिए अलग इंजीनियरिंग व्यवस्था भी मौजूद है। ऐसे में नई नियुक्ति के औचित्य और कार्यक्षेत्र को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले नियुक्त ऊर्जा सलाहकार को लेकर भी विवाद हो चुके हैं। पिछली सरकारों में भी नियुक्तियां होती रही हैं। सलाहकार नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य प्रदेशभर में चल रहे प्रोजेक्ट्स को समयावधि में पूरा करना है। इनकी नियुक्ति भी कोटा संभाग में चल रहे प्रोजेक्ट्स को समय से पूरा करवाने के लिए की गई है। -डॉ. हीरालाल नागर, ऊर्जा मंत्री भास्कर इनसाइट सवाल सिस्टम का यदि सलाहकार को सिर्फ सिविल प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग करनी है तो विभाग को स्पष्ट करना होगा कि मौजूदा सिविल और प्रोजेक्ट विंग कौन-सा काम नहीं कर पा रहे हैं। सलाहकार की विशेषज्ञता, कार्यकाल, अधिकार और जवाबदेही स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि पद अतिरिक्त प्रशासनिक लेयर बनकर न रह जाए। तकनीकी विभाग में सलाहकार की विशेषज्ञता और संबंधित क्षेत्र के अनुभव का सीधा संबंध भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में सवाल है कि ऊर्जा विभाग को नई विशेषज्ञता चाहिए या नया पद?