राजस्थान हाईकोर्ट ने तलाक की एक पुरानी डिक्री को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने पति-पत्नी का विवाह बहाल करते हुए उन्हें फिर से साथ रहने की अनुमति दी। अदालत ने कहा कि जब पति-पत्नी खुद अपने मतभेद खत्म कर वैवाहिक जीवन फिर से शुरू करना चाहें, तो कानून के तहत उनके मेल-मिलाप का रास्ता बनाना चाहिए। न्यायाधीश उमाशंकर व्यास और न्यायाधीश समीर जैन की खंडपीठ ने हनुमानगढ़ निवासी एक महिला की अपील पर यह आदेश सुनाया। इस मामले में हनुमानगढ़ की फैमिली कोर्ट ने 30 नवंबर 2024 को पति अमित की तलाक याचिका मंजूर की थी। इसके बाद 23 अक्टूबर 2015 को हुई उनकी शादी खत्म हो गई थी। सुनवाई के दौरान पति-पत्नी दोनों थे मौजूद अपील की सुनवाई के दौरान पति-पत्नी दोनों हाईकोर्ट में मौजूद थे। पहले इस मामले को 29 जनवरी 2026 को मध्यस्थता केंद्र भेजा गया था, लेकिन वहां समझौता नहीं हो पाया। बाद में हाईकोर्ट की कार्यवाही के दौरान आपसी बातचीत और कोर्ट के प्रयासों से दोनों के बीच सुलह हो गई। दोनों ने अपनी मर्जी से मतभेद खत्म कर फिर से साथ रहने की इच्छा जताई। खंडपीठ ने दंपती की नाबालिग बेटी के भविष्य को खास माना। कोर्ट ने कहा कि बेटी को माता-पिता दोनों का प्यार, देखभाल और भावनात्मक सुरक्षा मिलनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि वैवाहिक विवादों को सिर्फ कानूनी दावों तक सीमित नहीं देखना चाहिए, क्योंकि इनसे परिवार और मानवीय रिश्ते भी जुड़े होते हैं। कोर्ट ने 30 नवंबर 2024 की तलाक डिक्री को रद्द कर दिया। इसके साथ ही 23 अक्टूबर 2015 को हुई शादी को बहाल कर दिया गया। आदेश में कहा गया कि विवाह ऐसा माना जाएगा, जैसे तलाक की डिक्री कभी आई ही नहीं थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों से कहा कि वे भविष्य के मतभेद आपसी बातचीत, धैर्य और समझदारी से सुलझाएं।