राजस्थान में गांवों की सरकार चुनने का मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के लिए सियासी प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। 22 अक्टूबर को पहले चरण में 16 जिलों में मतदान होगा। असली जंग जिला प्रमुख की कुर्सी के लिए है, जिसके लिए मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और पूर्व मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर है। कहीं बागी उम्मीदवार पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने चुनौती बन रहे हैं, तो कहीं RLP और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के उम्मीदवारों ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। पहले चरण में 16 जिलों की 586 जिला परिषद सीटों पर 1,693 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर है। लेकिन इन चेहरों में कौन अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा बचाने उतरा है? किसकी जीत से पार्टी को जिला प्रमुख की कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता मिलेगा? कहां बागी उम्मीदवार बड़े दलों का खेल बिगाड़ सकते हैं? कहां दूसरे दल निर्णायक भूमिका में आ सकते हैं? पढ़िए मंडे स्पेशल स्टोरी में… 1. अजमेर : मंत्री वर्सेज पूर्व मंत्री की जंग साल 2020 के जिला प्रमुख चुनाव में भाजपा ने जिला परिषद की 32 में से 21 सीटें जीती थीं, लेकिन क्रॉस वोटिंग और कांग्रेस के समर्थन से तब बागी सुशील कंवर पलाड़ा जिला प्रमुख बन गई थीं। लेकिन इस बार RLP के 17 और 5 निर्दलीय उम्मीदवार कई वार्डों में नतीजे प्रभावित कर सकते हैं। ये उम्मीदवार कुछ वार्डों में दोनों पार्टियों के वोट काट सकते हैं तो कुछ जगह पर चुनाव जीतने की स्थिति में भी हैं। इस बार दावेदार कौन? : मसूदा के पूर्व MLA और जिला प्रमुख रह चुकी सुशील कंवर पलाड़ा जैसे अनुभवी चेहरे की सियासी भूमिका पर सबकी नजर रहेगी। पूर्व उप जिला प्रमुख हगामी लाल चौधरी भी मैदान में हैं। वहीं नसीराबाद के पूर्व विधायक महेंद्र सिंह गुर्जर की पत्नी और पूर्व प्रधान कमलेश गुर्जर भी चुनाव लड़ रही हैं। पूर्व मंत्री सांवरलाल जाट की पुत्रवधू और नसीराबाद MLA रामस्वरूप लांबा के भाई कैलाश की पत्नी सुनीता चौधरी व पूर्व मंत्री सांवरलाल जाट के भाई जगदीश लांबा भी चुनाव लड़ रहे हैं। किनकी प्रतिष्ठा दांव पर : कांग्रेस से पूर्व मंत्री रघु शर्मा। बीजेपी से मंत्री सुरेश सिंह रावत। 2. बाड़मेर : पूर्व मंत्री से लेकर छात्रनेता भी मैदान में साल 2020 भाजपा ने जिला परिषद की 37 में से 18 सीटें जीती थीं, लेकिन क्रॉस वोटिंग हुई और कांग्रेस के महेंद्र चौधरी जिला प्रमुख बन गए थे। इस बार RLP तीसरी ताकत के रूप में मौजूद है। खासकर उन क्षेत्रों में मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है, जहां RLP का स्थानीय जनाधार मजबूत है। ये बीजेपी और कांग्रेस, दोनों के लिए ही सिरदर्दी बनने वाला है। दिग्गज दावेदार कौन? : कांग्रेस से पूर्व मंत्री अमीन खान के बेटे शेर मोहम्मद, पूर्व मंत्री गफूर अहमद, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह गोदारा, बायतु MLA हरीश चौधरी के करीबी राजेंद्र कड़वासरा। बीजेपी से शिव के पूर्व प्रधान खंगार सिंह सोढा, उद्योगपति मनोहर सिंह पापड़ा, राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष प्रभा चौधरी और बायतु से बीजेपी के विधानसभा प्रत्याशी रहे बालाराम मुंड। किनकी प्रतिष्ठा दांव पर : कांग्रेस से पूर्व मंत्री हरीश चौधरी, पूर्व मंत्री अमीन खान, पूर्व विधायक मेवाराम जैन। बीजेपी से मंत्री केके विश्नोई, पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी और चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल। 3. अलवर : नेता प्रतिपक्ष से लेकर कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव साल 2020 के चुनाव में कोटपूतली-बहरोड़ का आधा हिस्सा अलवर में शामिल था। पिछले चुनाव में कांग्रेस के बलवीर छिल्लर जिला प्रमुख बने थे। लेकिन नए जिले के बनने के बाद ये पहला ही चुनाव है। 35 निर्दलीय प्रत्याशियों के अलावा बसपा की मौजूदगी बीजेपी-कांग्रेस दोनों को ही टेंशन दे रही है। खासकर कम अंतर वाले वार्डों में ये प्रत्याशी जीत-हार का अंतर प्रभावित कर सकते हैं। प्रमुख दावेदार कौन? : कांग्रेस से उप जिला प्रमुख रही ललिता मीणा, अनिता मीणा, रिटायर्ड प्रोफेसर विमला वर्मा। बीजेपी से सरस डेयरी के पूर्व चेयरमैन बन्नाराम मीणा की पत्नी संतोष मीणा, पूर्व सरपंच सीमा मीणा। किनकी प्रतिष्ठा दांव पर : कांग्रेस से नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह। बीजेपी से केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और वन मंत्री संजय शर्मा। 4. भीलवाड़ा : बीजेपी को मिल सकती है चुनौती साल 2020 में बीजेपी की बरजी देवी भील जिला प्रमुख बनी थीं। इस बार आरएलपी के 7 प्रत्याशी कुछ वार्डों में मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकते हैं। हालिया शहरी निकाय के नतीजों पर गौर करें तो बीजेपी काफी मजबूत नजर आ रही है। लेकिन ग्रामीण सत्ता के नतीजे चौंका भी सकते हैं। प्रमुख दावेदार कौन? : कांग्रेस से दुर्गपाल सिंह आशीष चौधरी, कोजीराम, कमल सिंह। बीजेपी से शिवराज, राहुल शर्मा, बजरंग सिंह और रूपलाल जाट। किनकी प्रतिष्ठा दांव पर : कांग्रेस से पूर्व मंत्री रामलाल जाट, पूर्व विधायक धीरज गुर्जर। बीजेपी से रामपाल शर्मा, पूर्व मंत्री कालूलाल गुर्जर। 5. बीकानेर : कांग्रेस को मिल सकती है चुनौती पिछली कई बार से कांग्रेस का जिला प्रमुख बनता आ रहा है। साल 2020 में कांग्रेस के मोडाराम जिला प्रमुख बने थे। बीकानेर में भाजपा और कांग्रेस की सीधी लड़ाई के बीच आरएलपी, माकपा और बसपा के प्रत्याशी भी मैदान में हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए निकिता डूडी और शिवलाल गोदारा जैसे प्रत्याशियों का प्रदर्शन अहम रहेगा, जबकि भाजपा के सामने संगठनात्मक बढ़त को सीटों में बदलने की चुनौती होगी। प्रमुख दावेदार कौन? : कांग्रेस से पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी की पुत्रवधू निकिता डूडी, पूर्व मंत्री गोविंद मेघवाल की बेटी सरिता चौहान। बीजेपी नेता महेश मुंड की पत्नी सुमन मुंड, पूर्व उप जिला प्रमुख इंदु देवी। किनकी प्रतिष्ठा दांव पर : कांग्रेस से पूर्व मंत्री गोविन्द मेघवाल, नोखा विधायक सुशीला डूडी, पूर्व मंत्री भंवर सिंह भाटी। बीजेपी से केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, पूर्व विधायक बिहारी लाल विश्नोई और कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा। 6. डूंगरपुर : 3 पूर्व विधायक चुनावी मैदान में साल 2020 में जिला प्रमुख चुनाव बड़ा रोचक रहा। कांग्रेस और बीजेपी ने मिलकर भाजपा के सिंबल पर जीती सूर्या अहारी को निर्दलीय जिला प्रमुख बनाया था। लेकिन इस बार भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने सभी 37 वार्डों में प्रत्याशी उतारे हैं। इसलिए उसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। बीजेपी और कांग्रेस के तीन पूर्व विधायकों की मौजूदगी ने चुनाव को और दिलचस्प बनाया है। प्रमुख दावेदार कौन? : कांग्रेस से पूर्व विधायक पूंजीलाल परमार और पूर्व जिला प्रमुख रही रतन देवी भराड़ा। बीजेपी से सांसद कनकमल कटारा की पुत्रवधू व सागवाड़ा की पूर्व विधायक अनिता कटारा, पूर्व जिला प्रमुख सूर्या अहारी के पति बलवीर अहारी, पूर्व विधायक देवेन्द्र कटारा और बीएपी से पार्टी के फाउंडर मेंबर कांतिलाल रोत और पूर्व जिलाध्यक्ष अनुतोष रोत। किनकी प्रतिष्ठा दांव पर : कांग्रेस से पूर्व विधायक पूंजीलाल परमार, बीजेपी से पूर्व सांसद कनकमल कटारा, पूर्व विधायक अनिता कटारा, पूर्व विधायक देवेंद्र कटारा और BAP से सांसद राजकुमार रोत। 7. झालावाड़ : क्या चलेगा वसुंधरा राजे का जादू पिछली बार बीजेपी की प्रेम बाई डांगी जिला प्रमुख बनी थीं। इस बार आम आदमी पार्टी के पांच और बसपा के दो प्रत्याशी मैदान में हैं। इनकी मौजूदगी कुछ वार्डों में वोटों का बंटवारा कर सकती है। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का राजनीतिक प्रभाव यहां बीजेपी के लिए मजबूती देने वाला होता है। प्रमुख दावेदार कौन? : कांग्रेस से झालावाड़ भूमि विकास बैंक की चेयरमैन पिंकी कंवर शेखावत। बीजेपी से पूर्व उपसभापति जयदीप सिंह झाला की पत्नी मीनाक्षी झाला। किनकी प्रतिष्ठा दांव पर : कांग्रेस जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह गुर्जर, बीजेपी से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और सांसद दुष्यंत सिंह। 8. जोधपुर : मदेरणा परिवार की जिला परिषद चुनाव से दूरी पिछले चुनाव में कांग्रेस की लीला मदेरणा जिला प्रमुख बनी थीं। इस बार कोई भी सदस्य जिला परिषद चुनाव नहीं लड़ रहा है। RLP ने 28 वार्डों में प्रत्याशी उतारकर कई वार्डों का मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। इससे दोनों पार्टियों के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। प्रमुख दावेदार कौन? : कांग्रेस से पूर्व उप जिला प्रमुख की मां कुसुम विश्नोई, पूर्व सरपंच ओम प्रकाश विश्नोई, संगठन महासचिव डॉक्टर राकेश चौधरी, राजूराम चौधरी। बीजेपी से देहात जिलाध्यक्ष त्रिभुवन सिंह भाटी। किनकी प्रतिष्ठा दांव पर : कांग्रेस से देहात जिलाध्यक्ष गीता बरवड़, बीजेपी से केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत व शेरगढ़ विधायक बाबू सिंह राठौड़। 9. कोटा : 2 मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर पिछली बार बीजेपी के मुकेश मेघवाल जिला प्रमुख बने थे। इस बार भी यहां भाजपा पूरी ताकत के साथ मैदान में है, जबकि कांग्रेस 25 की बजाय 24 वार्डों में मुकाबला कर रही है। यहां 11 निर्दलीय और आम आदमी पार्टी के 3 उम्मीदवार निर्णायक हो सकते हैं। प्रमुख दावेदार कौन? : कांग्रेस से देहात जिलाध्यक्ष भानु प्रताप की पत्नी निकिता, पूर्व देहात जिलाध्यक्ष व इटावा की पूर्व प्रधान सरोज मीणा। बीजेपी से भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व देहात जिलाध्यक्ष रहे बीएल गोचर की पत्नी रंजना गोचर, पीपल्दा विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी रहे मानवेन्द्र सिंह की पत्नी रजनी सिंह और पूर्व पंचायत समिति सदस्य कमलेश शर्मा, सावन भादो पंचायत की पूर्व सरपंच सोनू शर्मा। किनकी प्रतिष्ठा दांव पर : कांग्रेस से देहात जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह, बीजेपी से ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर और शिक्षा व पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर। 10. नागौर : बेनीवाल के गढ़ में बीजेपी-कांग्रेस को टक्कर पिछले चुनाव में बीजेपी के मुकेश मेघवाल जिला प्रमुख बने थे। इस बार RLP ने सभी 37 वार्डों में प्रत्याशी उतारे हैं, जो बीजेपी और कांग्रेस से ज्यादा हैं। ऐसे में यहां आरएलपी के बिना समर्थन जिला प्रमुख बनाना बीजेपी और कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा। प्रमुख दावेदार कौन? : कांग्रेस से पूर्व विधायक मंजू मेघवाल के जेठ व रिटायर्ड एईएन शंकरलाल व पुरखाराम भंवरिया। वर्तमान मंत्री मंजू वाघमार की रिश्तेदार श्वेता पंवार और बीजेपी से पूर्व मेड़ता विधायक सुखराम नेतड़िया। किनकी प्रतिष्ठा दांव पर : कांग्रेस से जिलाध्यक्ष हनुमान बांगड़ा, पूर्व मंत्री व नागौर विधायक हरेंद्र मिर्धा, जायल की पूर्व विधायक मंजू मेघवाल। बीजेपी से जिलाध्यक्ष रामधन पोटलिया, पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा व पूर्व सांसद सीआर चौधरी। 11. पाली : प्रदेशाध्यक्ष के गढ़ में बीजेपी ने हासिल की पहली बढ़त पिछले चुनाव में भाजपा ने 33 में से 30 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया था। कांग्रेस केवल 3 सीटों पर सिमट गई थी। जिला प्रमुख भाजपा की रश्मि सिंह बनी थीं। इस बार भी भाजपा ने यहां एक सीट निर्विरोध जीतकर बढ़त बना ली है। निर्दलीय और अन्य दल के उम्मीदवार भी मैदान में हैं। लेकिन सीधा मुकाबला कांग्रेस-बीजेपी में है। प्रमुख दावेदार कौन? : कांग्रेस से पूर्व जिला परिषद सदस्य व जिला महासचिव जोगाराम मेघवाल, कविता दहिया। बीजेपी से पूर्व पार्षद देवीलाल मेघवाल। किनकी प्रतिष्ठा दांव पर : कांग्रेस से जिलाध्यक्ष शिशुपाल सिंह, पाली विधायक भीमराज भाटी, पूर्व जिला प्रमुख व पूर्व विधायक खुशवीर सिंह जोजावर। बीजेपी से प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ व जिला अध्यक्ष सुनील भंडारी। 12. फलोदी : मुकाबला बन सकता है त्रिकोणीय पिछले चुनाव में फलोदी अलग जिला नहीं था, तब यह जोधपुर जिले का हिस्सा था। यहां RLP के 9 और निर्दलीय 14 उम्मीदवार मैदान में हैं। जिन वार्डों में भाजपा-कांग्रेस के बीच कम अंतर होगा, वहां तीसरे उम्मीदवारों को मिलने वाले वोट नतीजे बदल सकते हैं। इससे फलोदी के समीकरण त्रिकोणीय बनने के आसार हैं। प्रमुख दावेदार कौन? : कांग्रेस से लोहावट के पूर्व विधायक किशनाराम के गांव से जेतून विश्नोई, भंवरी विश्नोई, कुंभसिह पातावत की पत्नी मैना कंवर, जैसलमेर जिले में पूर्व प्रधान रहे भंवरलाल सारण की पोती मोहिता विश्नोई। बीजेपी से सुगनी विश्नोई, पूर्व प्रधान महिपाल भादू के परिवार से सरिता, पूर्व प्रधान भागीरथ बेनीवाल की पत्नी आशा विश्नोई, बीजेपी जिलाध्यक्ष ज्योति जाणी की बहन संतोष जाणी। किनकी प्रतिष्ठा दांव पर : कांग्रेस से जिलाध्यक्ष सलीम नागौरी, पूर्व जोधपुर जिला प्रमुख लीला मदेरणा। बीजेपी से जिला अध्यक्ष ज्योति जाणी केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत व चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर। 13. राजसमंद : बीजेपी को मिल सकती है चुनौती पिछले चुनाव में भाजपा की रतनी देवी जाट जिला प्रमुख बनी थीं। 25 सदस्यीय जिला परिषद में BJP ने 17 सीटें जीतकर जिला प्रमुख का पद हासिल किया था। इस बार 9 निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं। AAP, RLP और BAP की मौजूदगी भी कुछ सीटों पर वोटों का बंटवारा कर सकती है। प्रमुख दावेदार कौन? : कांग्रेस से ट्रक एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष व चारभुजा मंदिर के पुजारी परिवार से ताल्लुक रखने वाले लक्ष्मण गुर्जर, बिजनेसमैन प्रताप सिंह। बीजेपी से पूर्व सांसद हरिओम सिंह राठौड़ के बेटे करणवीर सिंह राठौड़ और उद्योगपति मदन सिंह चौहान। किनकी प्रतिष्ठा दांव पर : कांग्रेस से जिलाध्यक्ष आदित्य प्रताप चौहान, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी, पूर्व जिला अध्यक्ष देवकी नंदन गुर्जर, पूर्व जिला अध्यक्ष हरिसिंह राठौड़। बीजेपी से जिलाध्यक्ष जगदीश पालीवाल, सांसद महिमा कुमारी, विधायक दीप्ति माहेश्वरी। 14. उदयपुर : बीजेपी के सामने ग्रामीण क्षेत्र में बीएपी बनी चुनौती पिछले चुनाव में भाजपा की ममता कंवर पंवार जिला प्रमुख बनी थीं। हालांकि उदयपुर जिला बीजेपी का गढ़ माना जाता है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में BAP भी अच्छा प्रभाव रखती है। इस बार बीएपी की 20 सीटों पर मौजूदगी चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है। उदयपुर में मतदान तीन चरणों 22 अक्टूबर, 28 अक्टूबर और 3 नवंबर को होगा। प्रमुख दावेदार कौन? : कांग्रेस से पूर्व देहात अध्यक्ष व गोगुंदा के पूर्व प्रधान लाल सिंह झाला, पूर्व मंत्री उदय लाल आंजना के करीबी व वल्लभनगर के पूर्व विधायक गजेंद्र सिंह शक्तावत के भांजे राज सिंह झाला और मावली के विधायक पुष्कर डांगी के बेटे शांतिलाल डांगी। बीजेपी से पूर्व में वल्लभनगर विधायक प्रत्याशी रहे हिम्मत सिंह झाला, देहात के पूर्व जिलाध्यक्ष चंद्र गुप्त सिंह चौहान, मावली के पूर्व विधायक दलीचंद डांगी व खैरवाड़ा के पूर्व विधायक नानालाल आहारी। किनकी प्रतिष्ठा दांव पर : कांग्रेस से देहात जिलाध्यक्ष रघुवीर मीणा। बीजेपी से देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली व सांसद मन्नालाल रावत। 15. सिरोही : बीएपी बिगाड़ सकती है समीकरण 2021 में हुए पिछले चुनाव में भाजपा के अर्जुन पुरोहित जिला प्रमुख बने थे। इस बार भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के 10 और निर्दलीय प्रत्याशियों के 15 उम्मीदवार मैदान में होने से कई वार्डों में त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबले की संभावना है। यहां मतदान दो चरणों में होगा। प्रमुख दावेदार कौन? : कांग्रेस से पूर्व प्रदेश सचिव गुमान सिंह देवड़ा, डॉक्टर गुमान सिंह, किसान कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष नरेंद्र सिंह देवड़ा, आदित्य प्रताप सिंह। बीजेपी से गणपत सिंह राठौड़, पूर्व जिला उपाध्यक्ष गंगा सिंह, नारायण पुरोहित, पूर्व जिला परिषद सदस्य दिलीप जैन। किनकी प्रतिष्ठा दांव पर : कांग्रेस से सिरोही के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा, जिला अध्यक्ष लीलाराम गरासिया। बीजेपी से मंत्री ओटाराम देवासी, जिला अध्यक्ष रक्षा भंडारी। 16. जयपुर : दिग्गज मंत्री और सांसद की प्रतिष्ठा दांव पर पिछले चुनाव में जयपुर में बड़ा उलटफेर हुआ। कांग्रेस से जीती रमा चोपड़ा बाद में भाजपा में शामिल हो गईं और जिला प्रमुख बनीं। इस तरह जिला प्रमुख की कुर्सी भाजपा के पास चली गई। एक्सपर्ट की मानें तो सत्ताधारी दल होने के नाते बीजेपी मजबूत नजर आ रही है। लेकिन ग्रामीण बेल्ट में कांग्रेस को भी कमतर नहीं आंका जा सकता। इस बार कांगेस ने अनुभवी व युवा चेहरे उतारकर बीजेपी को बड़ी चुनौती दे रखी है। प्रमुख दावेदार कौन? : कांग्रेस से मोहन डागर और यशवीर सिंह सूरा प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। डागर पूर्व उप जिला प्रमुख रहे हैं और क्रॉस-वोटिंग के जरिए पद पर पहुंचे थे। वहीं बीजेपी से रमा चोपड़ा व जयपुर दक्षिण भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश गुर्जर। किनकी प्रतिष्ठा दांव पर : कांग्रेस से जयपुर जिला परिषद के निवर्तमान उप जिला प्रमुख और कांग्रेस के प्रदेश महासचिव मोहन डागर (खुद भी जिला परिषद चुनाव लड़ रहे हैं)। बीजेपी से मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़, सांसद राव राजेंद्र सिंह।