सरकारी अस्पताल में सिजेरियन के बाद दो प्रसूताओं की मौत और एक महिला की तबीयत बिगड़ने के मामले में इस्तेमाल की गई 6 दवाओं पर रोक लगाई गई है। जांच में सामने आया कि सीजेरियन महिलाओं को इंजेक्शन लगाए जाने के तुरंत बाद तेज कंपकंपी छूटने लगी थी। इसके बाद ड्रग विभाग की टीम ने संबंधित इंजेक्शन सहित 6 दवाओं के इस्तेमाल और सप्लाई पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। विभाग ने इन 6 अलग-अलग दवाओं के सैंपल लिए गए हैं। अब उन्हें लैब टेस्ट के लिए भेजा जाएगा। असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर प्रहलाद मीणा के अनुसार, रविवार को टीम ने अस्पताल पहुंचकर पीड़ित मरीजों को दी गई दवाओं के सैंपल जुटाए। घटना के पहले दिन एक फ्लूइड (आईवी फ्लूइड) पर संदेह जताया गया था, लेकिन पूर्व की जांच रिपोर्ट में वह मानकों के अनुरूप पाया।अगर डॉक्टर्स को दूसरी दवाओं पर शक है तो उनके भी सैंपल लेंगे। सोमवार को ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का भी सैंपल लेंगे। गौरतलब है कि मई में प्रसूताओं की मौतों के बाद दवाइयों पर ही शंका जताई गई थी, लेकिन दवाइयों से संबंधित कोई पुख्ता सबूत सामने नहीं आए थे। एक ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन जरूर फेल मिला था, लेकिन उसे मौतों का कारण नहीं माना गया था। इस मामले में अब तक 7 मेडिकल डिवाइसेज के सैंपल कोलकाता लैब में पेंडिंग हैं। इन 6 दवाओं के विशेष बैच की सप्लाई पर लगी रोक रोशन की मौत पर क्या बोले डॉक्टर अस्पताल प्रशासन के अनुसार प्रसूता रोशन को पुराने टांकों वाली जगह पर दर्द की शिकायत के कारण लेबर रूम में भर्ती कराया गया था। वह कुपोषण से पीड़ित थीं, हालांकि उनकी सोनोग्राफी रिपोर्ट सामान्य आई थी। रात करीब 12 बजे दर्द बढ़ने पर डॉक्टरों ने सर्जरी की। इसके बाद सुबह लगभग 7 बजे अचानक उन्हें घबराहट और सांस लेने में तकलीफ शुरू हो गई, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होने लगी, जिससे स्थिति बिगड़ गई। सरकार सिर्फ हाई रिस्क बता पल्ला झाड़ रही प्रदेश में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और मौतों के मामले सरकार के लिए भी पहेली बने हुए हैं। मई से जून के बीच कोटा, बीकानेर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा सहित कई जगहों प्रसूताओं की मौतें हुई, सरकार ने हर महिला को हाई रिस्क बताकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया, लेकिन अब एक बार फिर से कोटा में प्रसूताओं की उन्हीं परिस्थितियों में मौतें हुई हैं। इससे चिकित्सा जगत में हड़कंप है, आमजन डरा हुआ है। गायनी विभाग के डॉक्टर सहमे हुए हैं। भास्कर को सूत्रों ने बताया कि विभाग के कुछ रेजीडेंट्स इस स्थिति से सीट छोड़ने तक का विचार कर रहे हैं, कुछ रेजीडेंट्स की मनोचिकित्सकों से काउंसलिंग तक कराई गई है। इन सब घटनाओं में कॉमन फैक्टर यह है कि सभी प्रकरणों में सिजेरियन प्रसव के बाद ही इनकी मौतें हुई है। --- ये खबर भी पढ़ें… ड्रिप चढ़ाने के बाद नीला पड़ने लगा शरीर:सीजेरियन के बाद महिला की मौत का मामला, परिजन बोले, स्टाफ ने कहा हमारी जिम्मेदारी नहीं कोटा के मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में सीजेरियन ऑपरेशन के बाद एक बार फिर महिला की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि ड्रिप चढ़ाने के बाद मृतका का शरीर नीला-पीला पड़ने लग गया था। कहने के बाद भी हॉस्पिटल स्टाफ ने काफी देर तक मृतका को नहीं संभाला, जिससे उसकी मौत हो गई। (पूरी खबर पढ़ें)