राजस्थान हाईकोर्ट ने राजसमंद जिले में पीने के पानी की मांग को लेकर सरकारी रिकॉर्ड में विरोधाभास पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। राजसमंद झील में पेयजल की जरूरत के मुताबिक, पर्याप्त पानी उपलब्ध रखने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने जिला कलेक्टर को पीएचईडी से बात करके शपथपत्र देने का निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब जिला प्रशासन को झील में पानी की उपलब्धता और पेयजल जरूरतों को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी। कोर्ट ने साफ किया कि राजसमंद झील में पीने के पानी का पर्याप्त स्तर बनाए रखना जरूरी है। सिंचाई की जरूरत को पेयजल की प्राथमिकता से ऊपर नहीं रखा जा सकता। नागरिक अधिकार एवं उपभोक्ता संरक्षण संस्थान की याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील रवि भंसाली ने बताया कि आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, पीएचईडी ने 30 अक्टूबर 2023 को 2023-24 के लिए 749.37 एमसीएफटी पानी की जरूरत बताई थी, जो अगले दस सालों में 1100 एमसीएफटी तक बढ़ सकती है। वास्तविक जरूरत साफ करने का निर्देश हालांकि, 5 नवंबर 2024 की बैठक में 2024-25 और 2025-26 के लिए दो साल की कुल पेयजल जरूरत 500 एमसीएफटी बताई गई। याचिकाकर्ता ने बढ़ती आबादी के बावजूद मांग कम दिखाने पर सवाल उठाए। राज्य सरकार इन आंकड़ों का अंतर साफ नहीं कर पाई। हाईकोर्ट ने वास्तविक जरूरत साफ करने का निर्देश दिया है।