राजस्थान में अपराध के नौ महीने के आंकड़ों ने दो अलग तस्वीरें सामने रखी हैं। दुष्कर्म के 356 और बच्चों से जुड़े पॉक्सो के 478 मामले कम दर्ज हुए, जबकि घरेलू प्रताड़ना, दहेज की मांग और महिला संबंधी पारिवारिक विवादों के 583 मामले बढ़ गए। यानी कई गंभीर अपराधों में दर्ज मामलों का आंकड़ा नीचे आया है, लेकिन घर के भीतर प्रताड़ना की शिकायतें लेकर पुलिस तक पहुंचने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी है। हालांकि पुलिस मुख्यालय बढ़ी रिपोर्टिंग को महिलाओं में जागरूकता और पुलिस कार्रवाई के प्रति विश्वास का संकेत मान रहा है। जनवरी से सितंबर तक के तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष 1,47,534 मामले दर्ज हुए थे। इस वर्ष इसी अवधि में 1,45,781 मामले दर्ज हुए। इनमें 1,753 मामलों की कमी आई है। हत्या के 23 और हत्या के प्रयास के 174 मामले कम दर्ज हुए हैं। डकैती में 20%, लूट में 16% कमी संपत्ति संबंधी अपराधों में सबसे ज्यादा कमी डकैती के मामलों में दिखी है। डकैती के दर्ज मामले 19.67%, लूट के 16.40% और नकबजनी के 4.63% घटे हैं। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, अपराध रोकने के लिए निगरानी, गश्त और चिह्नित अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। नशे-हथियारों के मामलों में कार्रवाई का आंकड़ा बढ़ा नशा तस्करी के मामलों में 1,815 मामले अधिक दर्ज हुए हैं। यह वृद्धि 35.13 प्रतिशत है। आर्म्स एक्ट में 538 मामले यानी 10.17 प्रतिशत और आबकारी अधिनियम में 908 मामले यानी 4.92 प्रतिशत बढ़े हैं। पुलिस मुख्यालय ने इस बढ़ोतरी को नशे, अवैध हथियारों और शराब के खिलाफ सक्रिय कार्रवाई का परिणाम बताया है। घरेलू प्रताड़ना की शिकायतें 9,979 से बढ़कर 10,562 घरेलू प्रताड़ना, दहेज की मांग और महिला संबंधी पारिवारिक विवादों में पिछले वर्ष 9,979 मामले दर्ज हुए थे। इस वर्ष संख्या 10,562 हो गई। पुलिस के अनुसार, महिलाएं ऐसे मामलों में निर्भय होकर रिपोर्ट दर्ज करा रही हैं। सहायता और काउंसलिंग के लिए प्रत्येक वृत्त स्तर पर एक थाने में महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्र संचालित है। एसटी/एससी में 954 केस, 15% कमी आई पॉक्सो एक्ट के दर्ज मामलों में 478 यानी 19.20% की कमी आई है। दुष्कर्म के मामले 356 यानी 7.96% और छेड़छाड़ के मामले 603 यानी 7.38% घटे हैं। पुलिस मुख्यालय का दावा है कि छेड़छाड़ की रोकथाम में कालिका यूनिट, एंटी रोमियो स्क्वॉड और महिला सुरक्षा की अन्य योजनाओं की भूमिका रही है। एससी/एसटी अधिनियम के तहत भी 954 मामले कम दर्ज हुए हैं। इस श्रेणी में कमी 15.47% रही।