सुप्रीम कोर्ट से रिजल्ट पर रोक नहीं लगती तो आज राजस्थान क्रिकेट संघ की नई कार्यकारिणी शपथ ले लेती। पटरी से उतरी राजस्थान की क्रिकेट भी वापस पटरी पर आ जाती। अब एक बार फिर आरसीए में बैठे बाबू ही कुछ समय और राजस्थान की क्रिकेट चलाएंगे। वह भी अपनी मर्जी से। इसका एक उदाहरण बुधवार को ही सामने आ गया। 12 अक्टूबर से बीसीसीआई की अंडर-23 सीके नायडू ट्रॉफी का आयोजन होना है। आरसीए के बाबुओं ने अचानक 3 अक्टूबर से स्टेट चैम्पियनशिप कराने का फैसला ले लिया। 9 अक्टूबर को टीम नेशनल चैम्पियनशिप के लिए रवाना भी हो जाएगी। मात्र 6 दिन में ही आरसीए कैसे स्टेट चैम्पियनशिप का आयोजन कर लेगी, कैम्प भी लगा लेगी और खिलाड़ियों में आपसी बॉन्डिंग के साथ टीम भी ​सिलेक्ट कर लेगी, यह समझ से बाहर है। आरसीए के प्रशासक भास्कर ए. सावंत को कौन लोग इस तरह की सलाह दे रहे हैं और वे क्यों नहीं इस बारे में क्रिकेट के एक्सपर्ट्स से बात कर रहे हैं। यहां सवाल यह उठता है कि अंडर-23 में वही लोग खेलते हैं जो कि या तो सीनियर स्टेट चैम्पियनशिप कोल्विन शील्ड या फिर अंडर-19 में खेल चुके हैं। फिर इतना कम समय रहते अंडर-23 कराने का क्या औचित्य है। इस समय रणजी के प्रैक्टिस मैच चल रहे हैं उनमें भी अंडर-23 के दावेदार खिलाड़ी खेल रहे हैं फिर क्यों स्टेट चैम्पियनशिप कराने के लिए 2-3 करोड़ का खर्चा किया जा रहा है। इस समय जरूरत है क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी बनाने की नेशनल चैम्पियनशिप 12 से शुरू हो रही हैं। सिलेक्टर्स भी अपनी मनमर्जी से टीमें सलेक्ट कर रहे हैं। परफॉर्मर खिलाड़ियों को बाहर रखा जा रहा है, नॉन-परफॉर्मर को मौका दिया जा रहा है। सिलेक्टर्स पर नजर रखने के लिए भी क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी बनाए जाने की जरूरत है। लोढ़ा कमेटी में ऐसा प्रावधान है। भास्कर एक्सपर्ट रोहित झालानी, पूर्व रणजी कप्तान 12 अक्टूबर से बीसीसीआई टूर्नामेंट है। समय भी नहीं बचा है। सीनियर और अंडर-19 के बेस्ट परफॉर्मर खिलाड़ियों को ​सिलेक्ट करके प्रैक्टिस मैच कराकर टीम सलेक्ट करनी चाहिए। इसके अलावा पिछले साल के अंडर-23 के बेस्ट परफॉर्मर को इन प्रैक्टिस मैचों में शामिल करना चाहिए। वैसे भी अंडर-23 की स्टेट चैम्पियनशिप कराने के लिए पैसा बर्बाद करने की जरूरत ही नहीं है। 20 दिन में कॉल्विन हुई, 6 दिन में अंडर-23 कैसे होगी।