देवभूमि ऋषिकेश में मां गंगा के पावन सानिध्य में रामेष्ट-वेद-संस्कृत-गुरुकुलम्, मेहंदीपुर बालाजी के बटुकों का उपनयन, वेदारम्भ एवं उपाकर्म संस्कार वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। वेद निकेतन आश्रम की यज्ञशाला में आयोजित इस दिव्य संस्कार समारोह में वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण आध्यात्मिक एवं संस्कृतिमय हो उठा। सिद्धपीठ के महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज के सानिध्य में आयोजित समारोह में गुरुकुल के 30 नवीन बटुकों ने यज्ञोपवीत धारण कर वेदारम्भ की दीक्षा ग्रहण की। आचार्यों के मार्गदर्शन में उपनयन संस्कार की शास्त्रोक्त प्रक्रियाएं विधिपूर्वक संपन्न कराई गईं। संस्कार के तहत बटुकों ने मां गंगा के तट पर दशविध स्नान सहित वैदिक प्रक्रियाओं का श्रद्धा एवं निष्ठा के साथ पालन किया। इसके बाद यज्ञशाला में यज्ञ, मंत्रोच्चार एवं वेदारम्भ की विधियां संपन्न हुईं। यज्ञोपवीत धारण के साथ बटुकों ने वेदाध्ययन, ब्रह्मचर्य, अनुशासन, गुरुसेवा एवं सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। वहीं गुरुकुल के अन्य बटुकों एवं आचार्यों द्वारा उपाकर्म संस्कार भी विधिवत किया गया। उपाकर्म के माध्यम से वैदिक अध्ययन एवं स्वाध्याय की परंपरा के प्रति संकल्प व्यक्त किया गया। इस अवसर पर वेद निकेतन आश्रम के संतों का भी बटुकों को आशीर्वाद प्राप्त हुआ। मां गंगा की पावन धारा, ऋषिकेश की तपोभूमि, यज्ञाग्नि और वेदमंत्रों की गूंज के बीच संपन्न इस आयोजन ने गुरुकुल के बटुकों को भारतीय वैदिक परंपरा से जोड़ने का अवसर प्रदान किया। वैदिक ज्ञान एवं संस्कारों के साथ आधुनिक शिक्षा प्राचार्य घनश्याम हरदेनिया ने बताया कि रामेष्ट-वेद-संस्कृत-गुरुकुलम् में वैदिक ज्ञान एवं संस्कारों के साथ आधुनिक शिक्षा के समन्वय के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का प्रयास किया जा रहा है। गुरुकुल परिवार के अनुसार उपनयन एवं वेदारम्भ संस्कार बटुकों के जीवन में केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुशासन, संस्कार और उत्तरदायित्वपूर्ण जीवन की नई यात्रा का शुभारंभ है। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश में 30 नवीन बटुकों का वेदारम्भ तथा अन्य बटुकों एवं आचार्यों का उपाकर्म संस्कार गुरुकुल की वैदिक परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर रहा।