सवाई माधोपुर जिले में चूहे मारने के पाउडर से कोबरा की तबीयत बिगड़ गई। कोबरा को घर में तड़पते देख मकान मालिक ने वन विभाग को सूचना दी। मौके पर पहुंची टीम ने कोबरा का रेस्क्यू किया और वाइल्डलाइफ हॉस्पिटल में भर्ती करवाया। जहां दो दिन में 4 इंजेक्शन लगाकर कोबरा की जान बचाई गई। मामला डेकवा गांव का 22 अगस्त का है। डॉक्टर का कहना है कि शिकार की तलाश में कोबरा एक घर में घुस गया था। सरसों के कट्‌टों के बीच मे रखा जहरीला पाउडर उसके जीभ पर लग गया। जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई। सरसों के कट्टों के पास पड़ा मिला था कोबरा जानकारी के अनुसार, गांव में किसान राधेश्याम मीणा ने अपने घर में रखे सरसों के कट्टों के पास चूहों को मारने के लिए पाउडर डाला था। शिकार की तलाश में वहां पहुंचे जहरीले कोबरा की जीभ पर यह पाउडर लग गया, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। कोबरा की गंभीर हालत देखकर मकान मालिक ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। दो दिन चला इलाज, 4 इंजेक्शन लगाए सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम के सदस्य कुलदीप मौके पर पहुंचे और कोबरा को सुरक्षित रेस्क्यू कर रणथम्भौर टाइगर रिजर्व के वाइल्डलाइफ हॉस्पिटल पहुंचाया। वहां डॉक्टर सीपी मीणा ने उसकी मेडिकल जांच कर इलाज शुरू किया। उन्होंने बताया कि जब हॉस्पिटल में कोबरा को लाया गया था, तब उसकी जीभ बाहर थी। आशंका है कि जीभ के द्वारा कोबरा ने पाउडर खा लिया था, इसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने कोबरा को दो दिन निगरानी में रखा और कुल 4 लाइफ सेविंग इंजेक्शन लगाए। इलाज के बाद कोबरा की हालत में सुधार आया और अब वह पूरी तरह खतरे से बाहर है। उसे सोमवार को सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया। डॉक्टर ने बताया कि कोबरा में न्यूरो टॉक्सिन जहर पाया जाता है। अगर वह किसी को डस ले तो डसने के करीब एक घंटे में इलाज बहुत जरूरी होता है। समय पर इलाज नहीं मिले तो जान जा सकती है।