बारां जिले के शाहाबाद क्षेत्र में रोजगार का संकट गहरा गया है। काम नहीं मिलने के कारण सहरिया आदिवासी परिवार अपने घरों पर ताले लगाकर पलायन कर रहे हैं। देवरी और बीलखेड़ा डांग क्षेत्र से लोग जान जोखिम में डालकर वाहनों में लटककर सफर कर रहे हैं। इन परिवारों में महिलाएं, छोटे बच्चे, पानी की केन और बिस्तर भी साथ हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बरसात में खेती से गुजारा हो जाता है, लेकिन बाद में काम नहीं मिलता। वीबी-जीरामजी योजना में भी सिर्फ 10-15 दिन का काम मिल रहा है। मजबूरी में वे कोटा और इंदौर के ईंट-भट्ठों पर 300-400 रुपए दिहाड़ी के लिए जा रहे हैं। इस मामले पर बीलखेड़ा के ग्राम विकास अधिकारी महेश बोहरा और शाहाबाद विकास अधिकारी रामविलास मीणा ने कहा कि मस्टररोल की जानकारी लेकर काम शुरू करवाया जाएगा।