भास्कर न्यूज| बाड़मेर शहर में सुरक्षा तंत्र को और अधिक सुदृढ़ व आधुनिक बनाने की दिशा में गृह मंत्रालय, भारत सरकार के महानिदेशालय अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षक की टीम 1 अक्टूबर को स्थापित इलेक्ट्रिक सायरनों का ऑपरेशनल ट्रायल करेगी। गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह दूसरी बार है। शहर में सायरनों की व्यापक टेस्टिंग की जा रही है। इससे पहले 27 मार्च को इनकी टेस्टिंग की गई थी। अतिरिक्त जिला कलेक्टर रविंद्र कुमार ने आदेश जारी किए हैं। उन्होंने संबंधित विभागीय कार्मिकों को पाबंद किया है। वे गृह मंत्रालय से आने वाली विशेषज्ञ टीम और नागरिक सुरक्षा केंद्र, बाड़मेर के साथ तालमेल बनाएं। वे प्रत्येक सायरन का तय समय में सफल परीक्षण कराएं। इस दौरान सायरनों की ध्वनि क्षमता, कार्यप्रणाली और सभी तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच की जाएगी। एयर रेड वार्निंग सिस्टम के आधुनिकीकरण के तहत शहर के 5 सार्वजनिक स्थानों पर लगे सायरनों की कार्यक्षमता जांची जाएगी। इसके अंतर्गत पुलिस लाइन, बावड़ी, नगरपरिषद, रेन बसेरा और पीजी कॉलेज में स्थापित इलेक्ट्रिक सायरनों का ऑपरेशनल ट्रायल किया जाएगा। जिला प्रशासन ने शहरवासियों से अपील की है कि निर्धारित समयावधि में सायरन की तेज आवाज सुनाई देने पर बिल्कुल न घबराएं। इसे तकनीकी परीक्षण व मॉकड्रिल का हिस्सा समझें। नागरिक किसी भी प्रकार के भ्रम या अफवाह पर ध्यान न दें। यह प्रक्रिया आपातकालीन चेतावनी तंत्र को चाक-चौबंद व प्रभावी बनाने के उद्देश्य से अपनाई जा रही है।