जयपुर के सवाई मानसिंह हॉस्पिटल (SMS) में सर्जरी डिपार्टमेंट की टीम ने महिला के पेट से 28.6 किलोग्राम की गांठ निकाली। डॉक्टरों ने बताया- इस सर्जरी को करने में 3 घंटे से ज्यादा समय लगा। वहीं मरीज का पेट का बड़ा हिस्सा चीरा लगाकर खोलना पड़ा। हॉस्पिटल के जनरल सर्जरी ​डिपार्टमेंट के सीनियर प्रोफेसर डॉ. जीवन कांकरिया के नेतृत्व में उनकी टीम ने ये ऑपरेशन किया। डॉ. कांकरिया ने बताया- भरतपुर की रहने वाली 59 साल की महिला के 3-4 साल पहले भी पेट में गांठ हुई थी। तब गांठ छोटी थी और ऑपरेशन करके निकाली गई थी। इसके बाद गांठ दोबारा बन गई और 3 साल में तेजी से बड़ी हो गई। उन्होंने कई प्राइवेट हॉस्पिटल में दिखाया, लेकिन उन्होंने इसे निकालने से मना कर दिया। 20 सेमी. से ज्यादा लंबाई में लगाया चीरा डॉ. जीवन कांकरिया ने बताया- इस ऑपरेशन को करने के लिए मरीज के पेट पर करीब 22 से 24 सेमी लंबा चीरा लगाना पड़ा। उन्होंने बताया- सर्जरी के दौरान टीम को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। ट्यूमर के आगे ‘'यूरेटर’' होने के कारण उसे ट्यूमर से सुरक्षित रूप से अलग करना सबसे मुश्किल काम था। इसके अलावा ट्यूमर आंतों, अग्नाश्य, मूत्राशय और बड़ी धमनियों से भी चिपका हुआ था। उन्होंने बताया- महिला के पेट में ट्यूमर निकालने के लिए सर्जिकल टीम में डॉ. देवेंद्र सैनी, डॉ. गरिमा, डॉ. आशिमा, डॉ. गीतांश, डॉ. आकाश, डॉ. देवांश, डॉ. रजत और डॉ. हिमांशु शामिल रहे। वहीं एनेस्थीसिया टीम के डॉ. सुशील भाटी, डॉ. सुनील चौहान, डॉ. कंचन, डॉ. दीनदयाल और डॉ. दिव्या भटनागर का योगदान रहा। दुनियाभर में अब तक ऐसे 20 मामले रिपोर्ट डॉ. कांकरिया ने बताया- रेट्रोपेरिटोनियल सारकोमा पहले से ही दुर्लभ प्रकार के ट्यूमर माने जाते हैं। इनमें 20 किलोग्राम से अधिक वजन वाले जायंट रेट्रोपेरिटोनियल सारकोमा बेहद दुर्लभ हैं।उपलब्ध मेडिकल साहित्य में दुनियाभर में ऐसे लगभग 20 मामले रिपोर्ट हुए हैं।