सवाई मानसिंह हॉस्पिटल में पे माइनस पेंशन पर लगे डॉक्टर्स को यूनिट हेड और अन्य प्रशासनिक पदों पर लगाने का मामला फिर गर्मा गया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस मामले पर विधानसभा में एक प्रश्न लगाकर चिकित्सा शिक्षा विभाग से ऐसे डॉक्टर्स की जानकारी मांगी है। यही नहीं उन्होंने उन नियमों की भी जानकारी मांगी है, जिसमें ये उल्लेख है कि ऐसे डॉक्टर्स को क्या इन पदों पर नियुक्ति दी जा सकती है अथवा नहीं? सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों मेडिकल एज्युकेशन डिपार्टमेंट में आए इस पत्र के बाद खलबली मच गई। खासकर उन डॉक्टरों में जिनको सरकार की नियुक्ति के विपरित जाकर यूनिट हेड या प्रशासनिक पद पर लगाया है। नियमों में नहीं है प्रावधान सूत्रों के मुताबिक कार्मिक विभाग के जनवरी 2019 के नियमों में स्पष्ट प्रावधान है। इसमें उल्लेख है कि सरकार या विभाग की तरफ से जिस पद पर कर्मचारी या अधिकारी की पे माइनस पेंशन पर नियुक्ति होती है उसी पद पर वह काम कर सकता है। लेकिन सरकार की तरफ से हुई नियुक्ति के बाद कई विभाग के एचओडी अपने स्तर पर इन कार्मिकों को पद के विपरित अन्य खाली पदों का भी अतिरिक्त चार्ज या कार्यभार सौंप देते है, जो गलत है। 4 से ज्यादा डॉक्टर्स की नियुक्ति सवाई मानसिंह हॉस्पिटल में वर्तमान में चार से ज्यादा सीनियर डॉक्टर ऐसे है, जिन्हें पे माइनस पेंशन पर नियुक्ति दे रखी है। इनमें से 3 डॉक्टर तो ऐसे है, जिनको यूनिट हेड या दूसरी प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंप रखी है। इसमें कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में डॉ. एस.एम शर्मा और नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट में डॉ. धनंजय अग्रवाल को यूनिट हेड की जिम्मेदारी दे रखी है। जबकि डर्मेटोलॉजी डिपार्टमेंट में डॉ. दीपक माथुर को एसएमएस हॉस्पिटल में बनी डर्मेटोलॉजी क्लिनिक का इंचार्ज बना रखा है, जबकि आरएमसी के चैयरमेन डॉ. जगदीश मोदी को रिटायरमेंट के बाद उपाधीक्षक पद पर जिम्मेदारी बरकरार रखी है। डॉक्टर राजेश शर्मा है, जिन्हें एनिस्थिसिया डिपार्टमेंट में प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति दे रखी है।