ग्राम पंचायत के जागाजी जी नाथूवास, मंडी रोड स्थित भील बस्ती सहित आसपास के करीब 40 घरों की आबादी आजादी के दशकों बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रही है। करीब 200 मतदाताओं वाले इस इलाके में अब तक पेयजल पाइपलाइन नहीं पहुंची है। सरकारी सप्लाई नहीं होने से लोगों को पानी के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। जर्जर सड़क और स्ट्रीट लाइट के अभाव में रात होते ही बस्ती अंधेरे में डूब जाती है। ऐसे में ग्रामीणों को जंगली जानवरों के साथ चोरी का डर भी सताता है। पेयजल संकट का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक समाजसेवी ने अपने निजी कुएं में मोटर लगाकर घर के बाहर टंकी और नल की व्यवस्था की है। इसी नल से रोजाना करीब 40 परिवार पीने का पानी ले रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से समस्या बनी हुई है, लेकिन पंचायत और प्रशासन की ओर से स्थायी पेयजल व्यवस्था के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं हुआ। ग्रामीणों ने कहा कि हर चुनाव में प्रत्याशी बड़े-बड़े वादे कर वोट मांगते हैं, लेकिन जीतने के बाद बस्ती की समस्याओं की सुध नहीं लेते। कई कार्यकाल गुजरने के बावजूद हालात जस के तस हैं। इस बार ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि खोखले वादों पर वोट नहीं मिलेगा। जो प्रत्याशी टंकी, पाइपलाइन, स्ट्रीट लाइट और पक्की सड़क की व्यवस्था कराने का ठोस भरोसा देगा, उसी का समर्थन किया जाएगा। ग्रामीणों में पंचायत स्तर पर विकास की अनदेखी को लेकर नाराजगी है।