शहर से गुजर रहे हाईवे से ई-रिक्शा को हटाने का फैसला तो 9 साल पहले 2017 में हो गया था, लेकिन प्रशासन इनका विकल्प अब तक जमीन पर नहीं उतार पाया। ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड ने 19 जून 2025 की 90वीं बैठक में आगरा रोड, दिल्ली रोड, अजमेर रोड समेत कई प्रमुख मार्गों पर ई-रिक्शा और ई-कार्ट के संचालन पर दुबारा रोक लगाई थी। इसका मकसद धीमी रफ्तार के वाहनों को हाई स्पीड वाले मार्गों से हटाकर ट्रैफिक को गति देना और हादसों को रोकना था। वहीं, ट्रैफिक मैनेजमेंट के तहत शहर में चल रहे ई-रिक्शा का वेरिफिकेशन हुआ तो तस्वीर और बदल गई। शहर में दौड़ रहे 40 हजार में से केवल 8 हजार ई-रिक्शा ही फिट पाए गए। ऐसे में अनफिट 32 हजार ई-रिक्शा शहर से बाहर आ गए। भास्कर ने इनकी पड़ताल की तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। इनमें से 18 हजार ई-रिक्शा आगरा रोड और दिल्ली रोड पर दौड़ते मिले। यानी जो अनफीट ई-रिक्शा शहर में नहीं चल सकते वो हाईवे पर दौड़ रहे हैं। कागजों में दौड़ रही उपनगरीय बसें, टीपी लेकर अन्य रूटों पर दौड़ रहीं आगरा रोड और दिल्ली रोड पर रोजाना करीब 7,657 यात्रियों का आना-जाना है। इन यात्रियों को कॉलोनियों, बाजारों और मुख्य परिवहन नेटवर्क से जोड़ने के लिए ऑटो और उपनगरीय बसों की व्यवस्था की गई थी, लेकिन उपनगरीय परमिट लेने वाले बस संचालक टीपी लेकर अन्य रूट पर चला रहे हैं। भास्कर जब आगरा और दिल्ली रोड पर पहुंचा तो पूरे दिन में एक भी नहीं मिली। इनकी जगह ई-रिक्शा दिखे, जो हर मिनट 10-15 गुजर रहे। हालांकि 50 ऑटो और 50 मैजिक भी चलते मिले, जो हर 5 मिनट पर संचालित होते हैं। ट्रांसपोर्ट नगर से बस्सी; 76 बसों को परमिट, 25 किमी के रूट पर एक भी नहीं मिली रामगढ़ मोड़ से चंदवाजी; 98 बसों के परमिट, बड़ी चौपड़ या अन्य जगह से चल रही भास्कर एक्सपर्ट बजरंगलाल, ट्रांसपोर्टर टीपी बंद हो जाए तो सुधरेगी व्यवस्था