लंबे इंतजार के बाद शहर ओवरब्रिज की सुविधा तो मिली लेकिन तकनीकी खामियां और अधूरा काम आज भी राहगीरों के लिए परेशानी खड़ी कर रहा है। ब्रिज शुरू हुए दो माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक रोड लाइट नहीं लगी। रात होते ही अंधेरा छा जाता है। दूसरी ओर ब्रिज के नीचे सर्विस लेन का काम भी पूरा नहीं हुआ। जिससे आसपास के राहगीरों को गड्ढों और उबड़-खाबड़ रास्ते से होकर गुजरना पड़ रहा है। शहर के झालावाड़ रोड स्थित तेल फैक्ट्री फाटक पर बने आरओबी शुरू होने के बाद सबसे बड़ी समस्या रात के समय रोशनी की है। ब्रिज शुरू होने के दो माह से अधिक का समय बीत गया, लेकिन अब तक रोड लाइटें नहीं लग पाई हैं। रात में वाहन चालकों को अंधेरे में ही ब्रिज पार करना पड़ता है। जबकि ब्रिज पर वाहनों की आवाजाही लगातार रहती है, ऐसे में पर्याप्त रोशनी नहीं होने से दुर्घटना का खतरा बढ़ रहा है। कई बार रात के समय सड़क पर मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। ओवरब्रिज शहर की करीब 40 प्रतिशत आबादी वाले क्षेत्र को मुख्य शहर से जोड़ता है। तेल फैक्ट्री, बाबजी नगर, नाकोड़ा सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए यह महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी है। लेकिन ब्रिज की डिजाइन में पैदल राहगीरों की सुविधा का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। रेलवे फाटक बंद, पैदल आवाजाही का विकल्प सीमित सबसे बड़ी परेशानी यह है कि जिस रेलवे फाटक से पहले लोग पैदल और दोपहिया वाहनों से आवागमन कर लेते थे, उसे रेलवे ने पिछले दिनों बंद कर दिया गया है। ऐसे में ब्रिज पर पैदल चलने वालों के लिए फाटक क्रॉस करने की व्यवस्था बंद हो गई। साथ ही ओवर ब्रिज की चौड़ाई कम होने से फुटपाथ और पर चढ़ने के लिए सीढि़यां भी नहीं है। जिससे आसपास की आबादी को परेशानी उठानी पड़ रही है। एक तरफ पुराना रास्ता बंद हो गया और दूसरी तरफ नए ब्रिज पर फुटपाथ या पैदल पार करने का सुरक्षित विकल्प नहीं बनाया गया। नीचे सर्विस लेन का इंतजार, गड्ढों से निकल रहे शहरवासी ब्रिज के आसपास रहने वाले क्षेत्रवासियों को सर्विस लेन का इंतजार है। अभी भी लोगों को गड्ढों और खराब रास्ते से आवाजाही करनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ब्रिज बनने के बाद मुख्य मार्ग से आवागमन तो आसान हुआ, लेकिन नीचे की आबादी के लिए अभी रास्ता सुगम नहीं हुआ है। रोजाना स्कूल, बाजार और कामकाज के लिए निकलने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। खजूरपुरा तिराहे का घुमाव व टी-प्वाइंट भी चिंता का कारण ओवरब्रिज के खजूरपुरा तिराहे पर घुमाव और टी-प्वाइंट भी अब दुर्घटना की आशंका वाला स्थान बनता जा रहा है। यहां वाहन चालकों को अचानक मोड़ और सामने से आने वाले ट्रैफिक का अंदाजा नहीं लग पाता। सुरक्षा की दृष्टि से पर्याप्त संकेतक, रिफ्लेक्टर या अन्य इंतजाम भी नहीं किए गए। जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।