अलसीगढ़ बांध से हर साल सीपेज में व्यर्थ बहने वाले 36 एमसीएफटी पानी को बचाने की तैयारी है। 53 साल पुराने इस बांध की मरम्मत के लिए जलसंसाधन विभाग को डीएमएफटी से बजट मिल गया है। तकनीकी स्वीकृति के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। विभाग का लक्ष्य अगले मानसून से पहले मरम्मत पूरी करने का है। इससे बांध में पानी का रिसाव रुकेगा और पिछोला झील तक अधिक पानी पहुंच सकेगा। सीपेज में बर्बाद होने वाला पानी इतना है कि इससे शहर में करीब एक माह तक पेयजल सप्लाई की जा सकती है। बता दें कि अलसीगढ़ बांध कमजोर मानसून के दौरान शहर की झीलों के लिए बड़ा सहारा बनता है। हर साल मार्च में आता था पानी, इस बार सितंबर में ही जरूरत पड़ी अलसीगढ़ बांध देवास परियोजना का हिस्सा है। सामान्य तौर पर मार्च के आखिरी में होली के आसपास अलसीगढ़, मादड़ी और आकोदड़ा बांधों से पानी पिछोला में लाया जाता है। लेकिन इस बार कमजोर मानसून के कारण सितंबर में ही तीनों बांधों से पानी लाना पड़ा। अब तीनों बांधों में पानी खत्म होने के बाद पीएचईडी ने अगले साल जुलाई तक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 72 घंटे में पानी की सप्लाई शुरू कर दी है। साढ़े 3 साल से बजट की मांग कर रहा था विभाग, अब बंधी मरम्मत की उम्मीद जलसंसाधन विभाग साढ़े तीन साल से बांध की मरम्मत के लिए बजट की मांग कर रहा था। काम के लिए 12 करोड़ रु. की जरूरत बताई थी। अब डीएमएफटी से परियोजना का अनुमोदन हो चुका है। तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर होंगे। विभाग बोला- जल्द होंगे टेंडर, अगले मानसून से पहले मरम्मत का लक्ष्य बांध की मरम्मत के लिए डीएमएफटी को प्रस्ताव भेजा था। तकनीकी स्वीकृति की प्रक्रिया जारी है। स्वीकृति मिलते ही टेंडर करेंगे। लक्ष्य अगले मानसून से पहले मरम्मत पूरी करने का है। -मनीष नायक, एईएन, जलसंसाधन विभाग