सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में रविवार को क्षमावाणी सौहार्द पूर्वक मनाई गई। इस दौरान जिनालयों में जिनेंद्र भगवान के बड़े कलशाभिषेक, श्रीजी की जयमाल एवं क्षमावाणी आदि कार्यक्रम हुए। सोमवार को चमत्कारजी प्रबंध समिति के संयोजन में आलनपुर दिगंबर जैन नेमिनाथ अतिशय क्षेत्र दीवानजी की नसिया का वार्षिकोत्सव होगा। समाज के प्रवक्ता प्रवीण जैन ने बताया कि जिनालयों में सुबह जिनेंद्र भक्तों ने अष्ट द्रव्यों से क्षमावाणी की भक्ति पूर्वक विशेष पूजा की। साथ ही उपवासकर्ताओं ने विनती, भजन व मंगल गीत गाए और धर्म प्रभावना की। चमत्कारजी के विशुद्धमती सभागार में पंडित आशीष जैन शास्त्री ने कहा कि आपसी मतभेद दूर करना ही क्षमा है। क्षमा वीरों का आभूषण है। सबसे पहले व्यक्ति को अपने अंदर की कुलिशता को दूर करना चाहिए। उन्होंने सभी को संदेश देते हुए कहा कि अंतःकरण से वैर भाव का त्याग कर क्षमा भाव धारण कर मनुष्य को अपना कल्याण करना चाहिए। क्षमा सबसे बड़ा तप है। क्षमा में प्रेम, आस्था, ममता व समता का रस होता है।