16 दिसंबर को प्रकाशित खबर 2. सहदेव कस्वां (दलाल) : शहर में दूध की डेयरी का संचालन करता रहा, परिवार व रिश्तेदारों के नाम फर्जी पॉलिसियां करने के आरोप हैं। कम समय में ही लाखों रुपए कमाए, जैसे ही मामला चर्चा में आया और एसआेजी की एंट्री हुई तो फरार हो गया। 4. गणपत सोनी (दलाल) : इनकी पहचान कृषि पर्यवेक्षक आदूराम के संपर्क में आने के बाद बीमा पॉलिसियों से जुड़े व्यक्ति के रूप में हुई। पॉलिसियों के लिए 25 लाख रुपए तक लगाए और इसके लिए उधार भी लिया। किसानों से वसूली आदूराम ने कर ली थी। 1. आदित्य पाटोदिया (क्लस्टर हेड): कमेटी बनाकर जांच कराने की बात कही, लेकिन न कमेटी बनी और न प्रभावी जांच हुई। जांच एजेंसियों के पास कंपनी से जुड़े कथित लेन-देन के वीडियो होने की बात सामने आई है, जिसमें मशीन से नकदी गिने जाने का दृश्य बताया जा रहा है। वीडियो हटा दिया गया, जो रिकवरी के लिए लैब भेजा गया है। 3. आदूराम (कृषि पर्यवेक्षक) सेना से रिटायर्ड होकर करणू क्षेत्र में कृषि पर्यवेक्षक रहे। आरोप है कि इन्होंने गणपत सोनी के साथ मिलकर किसानों की पॉलिसियां कराईं। गणपत के अनुसार क्लेम आने के बाद दोनों के बीच विवाद भी हुआ। 2. अक्षय कुमार (जिला समन्वयक) : किसानों से कभी नहीं मिलते, हर बार मीटिंग में होने का दावा करते, जबकि दलालों के साथ उठना-बैठना रहा। सुभाष मुंडेल । नागौर फसल बीमा प्राकृतिक आपदा से किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए है, लेकिन नागौर में यही योजना सरकारी नुमाइंदों और दलालों के लिए कमाई का जरिया बन गई। पिछले 5 साल में फर्जी किसान, फर्जी दस्तावेज और बदले हुए बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपए के क्लेम उठे। जिसमें सरकारी वकील, वीडीओ, पटवारियों, कृषि पर्यवेक्षकों और दलालों का ऐसा गठजोड़ रहा कि नेटवर्क नागौर से जोधपुर, फलौदी, डीडवाना, चूरू तक फैल गया। एसओजी की कार्रवाई से पहले भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि नेटवर्क के तार किसान से लेकर दलाल, ई-मित्र संचालक, सरकारी कार्मिक और बीमा कंपनी से जुड़े कर्मचारियों तक है। जांच एजेंसियों के रडार पर 20 से अधिक संदिग्ध बताए जा रहे हैं, जबकि पूरे नेटवर्क में 100 से अधिक लोगों की भूमिका की जांच चल रही। 8. शिवकरण सिंवर (ई-मित्र संचालक) : जालनियासर निवासी शिवकरण ने वर्ष 2017-18 में ई-मित्र कियोस्क शुरू किया। कुछ बीमा पॉलिसियों में किसानों के खातों के बजाय अपने तथा रिश्तेदारों के बैंक खाते जोड़ दिए और भाई मनफूल सिंवर, भाभी भंवरी देवी सहित रिश्तेदारों के खातों के इस्तेमाल कर फर्जी क्लेम लिया। 7. किशनाराम ( वीडीओ ) सरकारी वकील बीरबल कमेड़िया के भाई है। श्यामसर, कंवलीसर सहित बीकानेर के कई गांवों में फर्जीवाड़ा कर करोड़ों रुपए हड़पे। जानकारी मिली कि विदेश भागने की तैयारी में है। इन पर 23 अगस्त को मुकदमा दर्ज हुआ। 5. खेराजराम नायक (एलडीसी): मुंदियाऊ गांव के खेराजराम के खिलाफ दो साल पहले बीमा गड़बड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ था। पर इसकी गिरफ्तारी नहीं हुई। मामले के अनुसार क्षेत्र में बड़े स्तर पर खेराजराम ने फसल बीमा में गड़बड़ियां की। 1. सीयाराम लोयल (कंपनी कर्मचारी व मुख्य दलाल): - खींवसर में इलेक्ट्रिशियन सीयाराम पहले बीमा कंपनी से जुड़ा। कमीशन में विवाद के बाद दलाली का नेटवर्क खड़ा किया। फर्जी खातों, दस्तावेजों से लाखों हड़पे। इंदास रोड पर आलीशान भवन बनवाया, गाड़ियां खरीदीं। Share with facebook 6. आईदानराम दुगेर (रेलवे कर्मचारी) : रायधनु निवासी आईदानराम की बहन व भांजी के नाम दूसरे जिलों में पॉलिसियां मिली। वहीं, भांजा महावीर खुद कंपनी का एजेंट है। सामने आया कि ये शातिर है तथा खुद की बजाय परिवार में पॉलिसियां की। पिछले कई दिनों से भूमिगत है। एसओजी के रडार पर कई और नाम: बुरड़ी के श्रवणराम गरवा, मुंदियाऊ के बाबूलाल सियाग, भेड़ के प्रेमचंद जाट, महावीर, पाबूसर निवासी जेठाराम सहित कई नाम जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। वहीं, कई लोग भूमिगत हो चुके है।