श्रावण पूर्णिमा शुक्रवार को आराध्य देव गोविंददेवजी मंदिर में रक्षाबंधन पर्व मनाया जाएगा। ठाकुरजी की कलाई पर तीन तरह की राखियां बांधी जाएंगी। दूब, रेशम और फूलों से तैयार इन राखियों के जरिए आत्मनिर्भरता और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया जाएगा। खास बात यह है कि ठाकुरजी को बांधी जाने वाली इस राखी पर राधा लिखा हुआ होगा। महंत अंजन कुमार गोस्वामी ठाकुरजी, राधारानी सहित उनकी सखियों और महाप्रभुजी शालिग्रामजी के विग्रहों को राखियां बांधेंगे। इस विशेष पल के हजारों गोविंद भक्त साक्षी बनेंगे। सुबह 9:30 से 10:15 बजे तक शृंगार झांकी में सबसे पहले ठाकुरजी का चंदन शृंगार होगा। मौली में गूंथी दुर्वा और गुलाब के पुष्प अर्पित किए जाएंगे। 1.सर्वप्रथम मंदिर सेवागीर द्वारा मोगरे की कली से बनाई राखी धारण कराई जाएंगी। 2.इसके बाद रेशम की डोर में सुपारी के साथ तैयार की गई बड़े आकार की कलाबूत की राखी बांधी जाएंगी। 3.तीसरी दूर्वा से तैयार राखी भी राधीरानी-ठाकुरजी और सभी विग्रहों को अर्पित की जाएंगी। तीनों राखियां बांधने के बाद ठाकुरजी को लड्डू, मीठी मठरी, पंचमेवा और फलों से मुंह मीठा कराया जाएगा। इस दौरान ठाकुरजी, राधारानी और सभी विग्रह लाल पट्टी पर जड़ाऊ वर्क की स्वर्णिम पीली पोशाक और विशिष्ट आभूषण धारण कर भक्तों को दर्शन देंगे। तीनों राखियां बांधने के बाद ठाकुरजी को लड्डू, मीठी मठरी, पंचमेवा और फलों से मुंह मीठा कराया जाएगा। इस दौरान ठाकुरजी, राधारानी और सभी विग्रह लाल पट्टी पर जड़ाऊ वर्क की स्वर्णिम पीली पोशाक और विशिष्ट आभूषण धारण कर भक्तों को दर्शन देंगे।