भास्कर न्यूज| बारां शहर में घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था का ट्रैकिंग सिस्टम बंद होने से डोर-टू-डोर कचरा लेने वाले वाहनों की मॉनिटरिंग कमजोर हो गई है। इसका फायदा उठाकर वाहन चालक कचरे को नियाना निस्तारण केंद्र तक कचरा पहुंचाने के बजाय शहर के आसपास ही कर रहे हैं। शहर के प्रमुख मार्गों और एंट्री पॉइंट पर इन वाहनों से खाली किए कचरे के ढेर इस लापरवाही की हकीकत बयां कर रहे हैं। शहर से रोजाना करीब 20 टन कचरा निकलता है। इसमें घरों के अलावा दुकानों, होटल, बाजार और सार्वजनिक स्थानों से निकलने वाला कचरा शामिल है। डोर-टू-डोर वाहनों के माध्यम से इसे एकत्र कर नियाना स्थित निस्तारण केंद्र तक पहुंचाया जाता है। इसके लिए वाहनों के रूट तय किए गए हैं। तय व्यवस्था के मुताबिक घर-घर से एकत्र किया कचरा नियाना पहुंचना चाहिए। लेकिन ट्रैकिंग बंद होने के बाद वाहन चालक बीच में सड़कों के किनारे ही कचरे को डम्प करने लगे हैं। जिससे भूल-भुलैया तिराहा, मांगरोल रोड, झालावाड़ रोड, मेलखेड़ी रोड और एनएच-27 बाईपास समेत कई स्थानों पर सड़क किनारे कचरे के ढेर लगे हैं। इन जगहों पर कचरा जमा होने से दुर्गंध फैल रही है और पशुओं का जमावड़ा रहता है। कई जगह कचरा उड़कर सड़क की ओर फैलने से वाहन चालकों और आसपास रहने वाले लोगों को भी परेशानी हो रही है। 11 गांव अभी भी वंचित शहर की सफाई व्यवस्था का एक बड़ा संकट वाहनों की कमी भी है। नगर परिषद के 60 वार्डों में कचरा संग्रहण के लिए फिलहाल सिर्फ 25 ऑटो टीपर और 10 ई-रिक्शा सहित 35 वाहन हैं। इतने वाहनों से पूरे शहर में नियमित डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करना चुनौती बना हुआ है। वाहनों की कमी से कई क्षेत्रों में नियमित कचरा संग्रहण नहीं हो पाता। जबकि नगर परिषद क्षेत्र में शामिल 11 गांवों में तो कचरा संग्रहण की व्यवस्था ही नहीं है। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा खुले में डालने की समस्या बनी हुई है। ट्रैकिंग से पता चलता था वाहन कहां गया, कितना चला नगर परिषद ने कुछ समय पहले डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण वाहनों की निगरानी के लिए ट्रैकिंग सिस्टम शुरू किया था। इससे प्रत्येक वाहन की लोकेशन और निर्धारित रूट की जानकारी मिलती थी। वाहन ने कितनी दूरी तय की और किस क्षेत्र में गया। इसकी भी निगरानी संभव थी। इससे अनावश्यक चक्कर और वाहनों के मनमाने संचालन पर अंकुश लगा था। ट्रैकिंग के दौरान वाहनों की वास्तविक आवाजाही सामने आने से डीजल खर्च में भी कमी आई थी। लेकिन कुछ समय बाद सिस्टम बंद हो गया। अब वाहनों की रियल टाइम लोकेशन उपलब्ध नहीं होने से मॉनिटरिंग मौके की जांच और कर्मचारियों की रिपोर्ट पर निर्भर हो गई है।