उदयपुर नगर निगम में डिप्टी मेयर पद पर भाजपा के दिनेश भट्ट निर्वाचित हुए। कुल 80 पार्षदों में से भट्ट को 56 वोट मिले। वहीं कांग्रेस के लक्ष्मीनारायण मेघवाल को 24 वोट मिले। भट्ट ने 32 वोट से जीत दर्ज की है। इस दौरान नगर निगम के टाउनहॉल में बड़ी संख्या में भाजपा समर्थकों ने नारे लगाए। नगर निगम में डिप्टी मेयर के लिए दोपहर ढाई बजे मतदान शुरू हुआ था। यहां सबसे पहले भाजपा पार्षदों ने आकर वोट किया था। इसके बाद कांग्रेस पार्षदों ने वोट किया। मतदान के बाद निर्वाचन अधिकारी ने परिणाम घोषित किए। 23 सितंबर को पारस सिंघवी और दिनेश भट्ट पदभार संभालेंगे और आभार यात्रा निकालेंगे। आदर्श आचार संहिता समाप्त निकाय चुनावों की निर्वाचन प्रक्रिया पूर्ण हेाने के साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के 309 में से 304 नगरीय निकाय क्षेत्रों से आदर्श आचार संहिता समाप्ति की घोषणा कर दी है। पहले 5 तस्वीरें देखे… भट्‌ट के नाम की सुबह की थी घोषणा इससे पहले मेयर पद पर बंपर जीत दर्ज करने वाली भाजपा में डिप्टी मेयर के नाम को लेकर मंगलवार सुबह 9:40 बजे तक सस्पेंस बना रहा। इसके बाद भाजपा ने दिनेश भट‌्ट को डिप्टी मेयर का प्रत्याशी बनाने के नाम का ऐलान किया। शीर्ष नेतृत्व से सहमति के बावजूद पार्टी भट‌्ट के नाम को खुलकर आगे करने से बच रही थी, ताकि आखिरी समय तक सस्पेंस बना रहे। कविता जोशी और पंकज बोराणा आखिरी तक रेस में बने रहे। संख्याबल के लिहाज से अधिकतर भाजपा पार्षदों ने कविता जोशी के नाम पर सहमति जताई, लेकिन वरिष्ठता और बडे़ नेताओं की पसंद दिनेश भट्‌ट के नाम पर सहमति बनी। इधर, कांग्रेस ने लक्ष्मीनारायण मेघवाल को डिप्टी मेयर के लिए प्रत्याशी बनाया था। मेघवाल कांग्रेस विवेक कटारा और रघुवीर मीणा के करीबी हैं। दिनेश भट्ट और कविता जोशी के नाम की थी चर्चा इससे पहले डिप्टी मेयर के नाम को लेकर काफी चर्चा भाजपा में हुई। दिनेश भट्ट के लिए शहर विधायक ताराचंद जैन, सतीश पूनिया और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला लगातार पैरवी कर रहे थे। पार्टी में लास्ट तक डिप्टी मेयर की रेस में दिनेश भट्‌ट और कविता जोशी के नाम पर चर्चा होती रही। पार्टी भट्‌ट के नहीं बनने की स्थिति में कविता जोशी का नाम बैकअप में रखकर चल रही थी और अंत में भटट का नाम फाईनल हुआ। प्रदेशाध्यक्ष की पसंद: भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ अपने रिश्तेदार पंकज बोराणा के नाम के लिए पैरवी करते रहे। उनका अनुभव नहीं होना उनके लिए कमजोरी बना। बोराणा पहली बार पार्षद बने हैं और जिला कार्यकारिणी में राठौड़ की दखल से उन्हें महामंत्री बनने का फायदा भी मिला था। तीसरा धड़ा: पार्टी का एक धड़ा कविता जोशी के नाम की पैरवी करवा रहा था। उनका संठनात्मक अनुभव भी ठीक था, मगर भट‌्ट जैसे बडे़ चेहरे के आगे युवा को आगे करना पार्टी नेताओ को उचित नहीं लगा। राष्ट्र सेविका समिति की कार्यकर्ता होने के साथ महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष कविता के नाम पर संघ ने इस पर सहमति जताई थी।