उदयपुर के प्रताप गौरव केंद्र में पिछले 10 दिन से राष्ट्रभक्ति और मेवाड़ के शौर्य को समर्पित 'दिवेर विजय महोत्सव' का आज समापन होगा। समारोह में मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत होंगे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा शिरकत करेंगे। महोत्सव के दौरान मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास, कला और संस्कृति को विभिन्न प्रतियोगिताओं, फिल्म, चित्रकला और दुर्लभ लिपियों की कार्यशालाओं के जरिए जीवंत किया गया। समापन समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा। बहुचर्चित नुक्कड़ नाटक 'दिवेर का रणघोष' का मंचन भी होगा। क्यों खास है 'दिवेर' और यह महोत्सव? इतिहास में वर्ष 1582 का 'दिवेर का युद्ध' मेवाड़ के लिए सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जाता है। प्रसिद्ध इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड ने इस युद्ध को 'मेवाड़ का मैराथन' की संज्ञा दी थी। यह वही ऐतिहासिक युद्ध था, जिसमें वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप ने मुगलों के अभेद्य किलों पर विजय प्राप्त कर उन्हें मेवाड़ से खदेड़ दिया था। वहीं अपनी विजय यात्रा की शुरुआत की थी। इसी शौर्य, स्वाभिमान और ऐतिहासिक विजय की स्मृति को युवा पीढ़ी के दिलों में जगाए रखने के लिए प्रताप गौरव केंद्र हर साल इस भव्य महोत्सव का आयोजन करता है। कुंभा सभागार में शाम 4 बजे से सजेगा मंच महोत्सव के संयोजक रमन सूद ने बताया- समापन समारोह प्रताप गौरव केंद्र परिसर स्थित कुंभा सभागार में शनिवार शाम 4 बजे से शुरू होगा। समारोह की अध्यक्षता सिक्योर मीटर्स लिमिटेड के चेयरमैन एवं ‘धरोहर’ न्यास के संजय सिंघल करेंगे। वहीं नगर निगम उदयपुर के महापौर पारस सिंघवी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। सह-संयोजक हरीश राजानी ने बताया- वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा और महामंत्री दीपक शुक्ल ने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर सभी व्यवस्थाओं को शुक्रवार को अंतिम रूप दे दिया। संभाग विजेताओं के बीच भाषण की जंग और ‘दिवेर का रणघोष’ समापन समारोह से पहले शनिवार सुबह राज्यस्तरीय भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। यह प्रतियोगिता बेहद रोमांचक होगी, क्योंकि इसमें राजस्थान के सभी संभागों से प्रथम स्थान प्राप्त कर आए सर्वश्रेष्ठ वक्ता अपनी वाकपटुता और ज्ञान का लोहा मनवाएंगे। नुक्कड़ नाटक 'दिवेर का रणघोष' का होगा मंचन प्रताप गौरव केंद्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने बताया- महोत्सव के विशेष आकर्षण नुक्कड़ नाटक 'दिवेर का रणघोष' का शनिवार को दो स्थानों पर मंचन होगा। दोपहर में इसका मंचन वीबीआरआई में और शाम को मुख्य समापन समारोह के मंच पर किया जाएगा। इससे पहले शुक्रवार को मीरा कन्या महाविद्यालय और शिल्पग्राम के समीप स्थित सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र के नवीन परिसर में देशभर से आए शिक्षकों और छात्रों के समक्ष इसका मंचन किया गया। निबंध प्रतियोगिता के परिणाम घोषित महोत्सव के सहसंयोजक डॉ. देवेंद्र श्रीमाली ने बताया- राज्यस्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को समापन समारोह में सम्मानित किया जाएगा। विद्यालय स्तर: चेतना कुंवर (प्रथम), खुशबू कुंवर सुवावत (द्वितीय), शोभा भोई (तृतीय)। सांत्वना पुरस्कार के लिए दिव्या सनाढ्य और खुशी कुमारी सेन का चयन किया गया। महाविद्यालय स्तर: प्रीतम सेवक (प्रथम - वीएमओयू डूंगरपुर), अजय नागदा (द्वितीय - सुविवि), दीक्षिता कुंवर (तृतीय - माउंट आबू)। सांत्वना पुरस्कार के लिए नैना वाधवानी और शिव प्रकाश वर्मा (सुविवि) को चुना गया। मुक्त श्रेणी: विशाल पालीवाल (प्रथम - परिष्कार कॉलेज जयपुर), चतुर्भुज गायरी (विद्या भवन), सीमा कुमारी, पिंकी गायरी (सिरोही) और मुकेश तेली (फलासिया) को पुरस्कार के लिए चुना गया। युवाओं ने दुर्लभ लिपियों और सिनेमा के गुर सीखे महोत्सव के दौरान केवल कला ही नहीं, बल्कि इतिहास के गंभीर पहलुओं पर भी काम हुआ। यहां आयोजित 7 दिवसीय कार्यशाला में युवाओं को पुरालेख, पुरालिपि और फारसी भाषा के ऐतिहासिक दस्तावेजों को पढ़ने और समझने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। आज के दौर में जब पुरानी लिपियों को पढ़ने वाले विशेषज्ञ बेहद कम बचे हैं। यह कार्यशाला इतिहास के शोधार्थियों के लिए एक दुर्लभ और अनूठा अवसर साबित हुई। इसके साथ ही आयोजित फिल्म कार्यशाला के संयोजक अरविंद चौधरी ने बताया- दिल्ली और मुंबई से आए विशेषज्ञ प्रशिक्षक अमन भाटिया, संदीप, परविंदर सिंह और अमिताभ श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों को निर्देशन, सिनेमाटोग्राफी, एडिटिंग, ध्वनि संयोजन और अभिनय के व्यावहारिक गुर सिखाए। कार्यशाला में बताया कि सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज और सांस्कृतिक पहचान को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। इस दौरान 7 चुनिंदा फिल्मों की स्क्रीनिंग और समीक्षा भी की गई। कैनवास पर जीवंत हुआ मेवाड़ का शौर्य और संस्कृति कार्यशाला संयोजक प्रो. रामसिंह भाटी ने बताया- राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला में देश के नामचीन कलाकारों ने मेवाड़ के इतिहास को कैनवास पर उतारा। सुनील कुमार विश्वकर्मा ने चटक रंगों से 'भवाई नृत्य' की मनमोहक भंगिमाओं को दर्शाया। दुर्जन सिंह राणा (बुलंदशहर) ने हाड़ी रानी के बलिदान के बाद राणा रतन सिंह की भावुक मनोदशा को चित्रित किया। दीपंकर रे (पश्चिम बंगाल) ने गणगौर, महलों और झीलों के माध्यम से मेवाड़ की संस्कृति को उकेरा। अभिषेक आचार्य (महाराष्ट्र) ने बप्पा रावल और हारित ऋषि की ऐतिहासिक मुलाकात तथा एकलिंगजी की स्थापना के प्रसंग को कैनवास पर पिरोया।