उदयपुर में गुरुवार को एक पशु बाड़े में लेपर्ड के तीन शावक मिलने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शावकों की निगरानी शुरू की। शावकों की मां आसपास होने की संभावना के चलते फिलहाल उनका रेस्क्यू नहीं किया गया है। मादा लेपर्ड को पकड़ने के लिए मौके पर पिंजरा लगाया गया है। साथ ही उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरे ट्रेप भी लगाए गए हैं। वल्लभनगर उपखंड क्षेत्र के मंदेसर गांव के आबादी क्षेत्र में सुरेश मेघवाल के पशु बाड़े में तीन शावक दिखाई दिए। सुरेश बाड़े में चारा लेने गए थे। इसी दौरान उनकी नजर शावकों पर पड़ी। उन्होंने तुरंत ग्रामीणों और वन विभाग को इसकी सूचना दी। इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। लोगों और मवेशियों को खतरा वन विभाग को संभावना है कि शावकों की मां मादा लेपर्ड आसपास ही मौजूद है। ऐसे में शावकों को तत्काल वहां से हटाना उचित नहीं है। ऐसे में लेपर्ड के शावकों को सदमा लग सकता है। वन विभाग के रेंजर रविंद्र सिंह ने बताया- मादा लेपर्ड को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया गया है। टीम लगातार पूरे क्षेत्र की निगरानी कर रही है। निगरानी के लिए कैमरे ट्रेप की मदद ली जा रही है। परिस्थितियों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इधर, आबादी क्षेत्र के नजदीक पशु बाड़े में शावक मिलने से ग्रामीणों में भय का माहौल है। ग्रामीणों को संभावना है कि मादा लेपर्ड की मौजूदगी से आसपास के लोगों और मवेशियों को खतरा हो सकता है। वन विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने और शावकों के पास नहीं जाने की अपील की है। इंसान पास जाए तो शॉक जैसी स्थिति हो सकती वन्यजीव एक्सपर्ट डॉ. सतीश कुमार शर्मा कहते हैं कि लेपर्ड के शावकों की मां आसपास नहीं हो और कोई इंसान उनके पास चला जाए। शावकों को डर या तनाव के कारण शॉक जैसी स्थिति हो सकती है। शर्मा बताते हैं कि मां से बिछड़ना, मां के आसपास नहीं होने पर शावक असुरक्षित महसूस कर सकते हैं। छोटे शावकों को बार-बार छूने या उठाने से चोट, तनाव और संक्रमण का खतरा हो सकता है। वे कहते हैं कि ऐसे मामलों में शावकों को छूना या उनके पास भीड़ लगाना नहीं चाहिए। वन विभाग को ही उन्हें संभालने देना चाहिए। मां अक्सर भोजन की तलाश में दूर गई हो सकती है और वापस लौटती ही है। इनपुट : रमेश डांगी, वल्लभनगर