सवाई माधोपुर जिले में रविवार शाम से फिर मौसम का मिजाज बदल गया। तेज हवाओं के चलने से तापमान में गिरावट आई और मौसम सुहावना हो गया। सोमवार को दिनभर आसमान में बादल छाए रहे। सोमवार शाम करीब 4 बजे जिले के कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। वहीं बालेर, खिरनी और बौंली क्षेत्र में तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी हुई। मौसम में आए बदलाव से लोगों को गर्मी से राहत मिली। रविवार को जिले का अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो सोमवार को गिरकर 30 डिग्री सेल्सियस रह गया। इस तरह तापमान में करीब 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। दिनभर बादल छाए रहने और ठंडी हवाएं चलने से मौसम में ठंडक महसूस हुई। अचानक बदले मौसम का असर बाजारों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी नजर आया। शाम के समय बारिश होने से वातावरण सुहावना हो गया। कृषि वैज्ञानिक डॉ. नुपुर शर्मा के अनुसार खेतों में जिन किसानों ने फसल काटकर रखी है, उनके लिए यह मौसम नुकसानदायक हो सकता है। खेत में कटी फसल पड़ी होने पर बारिश और नमी के कारण फसल खराब होने की आशंका रहती है। ऐसे में किसानों को कटी फसल को सुरक्षित स्थान पर रखने की जरूरत है। हालांकि खेतों में खड़ी फसल पर फिलहाल इस मौसम से किसी बड़े नुकसान की आशंका नहीं है। वहीं अक्टूबर माह में किसानों द्वारा सरसों की बुवाई शुरू की जानी है। ऐसे में वर्तमान बारिश किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। बारिश से खेतों में नमी बढ़ेगी, जिससे आगामी सरसों की बुवाई के लिए खेत तैयार करने में किसानों को फायदा मिलेगा। पर्याप्त नमी रहने से बीज के अंकुरण में भी मदद मिल सकती है। औसत से 66 एमएम कम बारिश: सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में इस वर्ष अब तक करीब 599 एमएम बारिश दर्ज की गई है। जिले की औसत वार्षिक बारिश करीब 665 एमएम मानी जाती है। इस लिहाज से इस वर्ष अब तक औसत बारिश से करीब 66 एमएम कम बारिश हुई है। पिछले वर्ष जिले में औसतन 1249.80 एमएम बारिश दर्ज की गई थी। यह जिले की औसत बारिश से करीब 625 एमएम अधिक थी। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अब तक बारिश का आंकड़ा काफी कम है। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष जिले में सबसे अधिक बारिश भाड़ौती क्षेत्र में दर्ज की गई। यहां अब तक करीब 777 एमएम बारिश हुई। इस बारिश का किसानों पर मििश्रत प्रभाव रहेगा : विशेषज्ञ सितंबर के अंतिम दिनों में हुई बारिश को अक्टूबर में होने वाली सरसों की बुवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बारिश से खेतों में नमी बनी है, जिससे किसानों को खेत तैयार करने में मदद मिलेगी। जिन क्षेत्रों में बारिश कम हुई, वहां किसान सिंचाई के साधनों पर अधिक निर्भर रहेंगे। जिन क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश हुई, वहां खेतों में नमी होने से आगामी फसल की बुवाई का काम अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस समय किसानों को मौसम को देखते हुए कटी फसल को खुले में नहीं छोड़ना चाहिए। यदि बारिश की संभावना बनी रहती है तो फसल को ढंककर या सुरक्षित स्थान पर रखना जरूरी है। दूसरी ओर खड़ी फसलों में जलभराव की स्थिति नहीं बनने पर वर्तमान बारिश को लाभदायक माना जा रहा है। जिले में रविवार शाम से शुरू हुआ मौसम परिवर्तन किसानों के लिए मिश्रित असर लेकर आया है। एक ओर कटी फसल के लिए बारिश और नमी चिंता का कारण है, वहीं सरसों की आगामी बुवाई के लिए खेतों में बनी नमी किसानों के लिए राहत देने वाली है।