जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग झालावाड़ ने जयपुर विकास प्राधिकरण के खिलाफ सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने जेडीए को आदेश दिया है कि वह परिवादी को उनकी जमा की गई राशि ब्याज सहित वापस लौटाए और मानसिक परेशानी के लिए अलग से जुर्माना और मुआवजा दे। परिवादी झालरापाटन पुलिस में एएसआई विष्णुकांत की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सुनील कुमार गुप्ता ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि मुवक्किल ने जेडीए की अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी 2009 के तहत ग्राम भम्भौरी कलवाड़ रोड जयपुर में एक फ्लैट के लिए के लिए आवेदन किया था। जेडीए द्वारा 7 अगस्त 2013 को लॉटरी के माध्यम से फ्लैट एल- 4, एफटी 16 आवंटित किया गया था। इस आवंटन के तहत परिवादी ने समय समय पर कुल 3 लाख 83 हजार 226 रुपए जेडीए को जमा करवाए थे। पूरी राशि जमा होने के बाद जेडीए ने 11 साल तक फ्लैट का कब्जा नहीं दिया। जब इसकी जानकारी ली गई तो पता चला कि जेडीए ने 2024 में बिना किसी सूचना के किसी दूसरी जगह में फ्लैट आवंटित कर दिया, जिसकी स्थिति कबाड़ जैसी थी। इसका विरोध करते हुए उन्होंने 27 जनवरी 2026 को जेडीए को लीगल नोटिस भेजकर राशि वापस मांगी, लेकिन जेडीए ने न तो राशि लौटाई और न ही कोई जवाब दिया। इस पूरे मामले की सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष ईश्वरीलाल वर्मा और सदस्य वीरेंद्र सिंह रावत की पीठ ने परिवादी के पक्ष में एकपक्षीय आदेश पारित किया। आयोग ने जेडीए को परिवादी द्वारा जमा की गई कुल राशि 3 लाख 83 हजार 226 रुपए आदेश के दिनांक से 2 महीने में लौटाने तथा नोटिस की दिनांक से भुगतान होने तक इस राशि पर 9 फीसदी वार्षिक दर से ब्याज अदा करने के आदेश दिए। मानसिक परेशानी के लिए 30 हजार रुपए और परिवाद खर्च के 10 हजार रुपए अलग से देने होंगे।