देश की संसद से लेकर पीएमओ और दिल्ली मेट्रो को रोशन करने में झुंझुनूं की मिट्टी का बड़ा योगदान है। ऊर्जा क्षेत्र में झुंझुनूं उत्तर भारत का सबसे मजबूत ‘पॉवर हब' बनकर उभरा है। जिले में स्थित दो बड़े पावर जंक्शन बबाई और जसरापुर देश की राजधानी दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के औद्योगिक व घरेलू तंत्र की रीढ़ बन चुके हैं। जैसलमेर और बीकानेर के सौर ऊर्जा पार्कों से पैदा होने वाली ग्रीन एनर्जी जसरापुर जंक्शन के जरिए दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय, बड़े कारखानों और दिल्ली मेट्रो तक पहुंच रही है। वर्ष 2027 तक इन दोनों जंक्शनों की कुल क्षमता बढ़कर 2400 मेगावाट से अधिक हो जाएगी। वहीं, जिले में सौर ऊर्जा का दैनिक उत्पादन 10 लाख यूनिट से बढ़कर 20 लाख यूनिट पहुंचने वाला है। प्रदेश के बिजली के ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए 2024 में बबाई में 400 केवी का पावर जक्शन शुरू किया था। इसमें सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर प्लांट से 480 किलोमीटर दूर से डबल सर्किट हाईटेंशन लाइन की मदद से बिजली आ रही है। 630 मेगावाट के इस जंक्शन की आने वाले एक साल में क्षमता 315 मेगावाट बढ़कर 945 मेगावाट हो जाएगी। पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (पीजीसीआईएल) जसरापुर के अधिकारियों के अनुसार पावर जंक्शन की प्रसारण क्षमता दोगुनी करने का प्रस्ताव चल रहा है। 2027 तक 8,000 मेगावाट तक की सोलर पावर को आगे डिस्ट्रीब्यूट करने का लक्ष्य है।