कस्बे में 1960 में बनी पंचायत के पहले सरपंच किशनलाल सिंघवी निर्विरोध बने थे। पंचायत के दूसरे सरपंच देवीसिंह भाटी भी निर्विरोध चुने गए थे। इसके बाद सभी सरपंचों का चुनाव हुआ। परिसीमन के बाद अब पंचायत में 4300 वोटर हैं। ये वोटर गांव की सरकार बनाने के लिए अपना 9वां सरपंच चुनेंगे। संभावित उम्मीदवार घर-घर जाकर वोट मांग रहे हैं। चाय की थड़ी, गलियों, नुक्कड़ों पर चुनाव की चर्चा चल रही है। इस बार सरपंच प्रत्याशी सामान्य होने से चुनाव रोचक रहने की संभावना है। गांव में संभावित प्रत्याशियों के बैनर भी लगने लगे हैं। वार्ड चुनाव में 50 प्रतिशत महिला उम्मीदवार होने के बाद भी अभी तक एक-दो महिलाएं ही प्रचार में दिख रही हैं। अब तक दुर्गा बाई सनाढ्य, भगवतीदेवी भील, दीपमाला विक्रमसिंह भाटी सरपंच का चुनाव जीतकर सरपंच बनी हैं। सबसे ज्यादा 1962 से 1991 तक देवीसिंह भाटी पंचायत के सरपंच रहे हैं। प्रभुलाल रेगर, अर्जुनलाल तेली, बाबूलाल खारोल पांच-पांच साल तक सरपंच रहे हैं। परिसीमन के बाद तीन राजस्व गांव तेजपुरा, देवगांव, अमलोई दूसरी पंचायत में चले गए। नया राजस्व गांव फतहपुरा राज्यावास पंचायत में शामिल हुआ।