निगम चुनाव में 52 प्रत्याशियों के सामने दिलचस्प स्थिति है। वे जिस वार्ड से चुनाव लड़ रहे हैं, वहां खुद का वोट नहीं हैं। यानी दूसरों से वोट मांगेंगे, लेकिन अपना वोट दूसरों को देंगे। जयपुर के दोनों निगमों के विलय के बाद 250 की जगह 150 वार्ड हो गए। इससे पुराने वार्डों का भूगोल बदला तो वर्षों से इलाके में राजनीति कर रहे मजबूत दावेदार अपने वार्ड से चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं रहे। पार्टी में पकड़ और जीत की संभावना होने के कारण भाजपा-कांग्रेस ने ऐसे कई नेताओं का टिकट काटने के बजाय उनका ‘चुनावी पता’ बदल दिया। प्रत्याशी का वोट एक वार्ड में है और चुनाव दूसरे वार्ड से लड़ रहा है। हालांकि कई जगह पर दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को बाहरी कहकर विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। अब इन 52 प्रत्याशियों के सामने दोहरी परीक्षा है। पहली- नए वार्ड के मतदाताओं को यह भरोसा दिलाना कि वे ‘बाहरी’ नहीं हैं। दूसरी- अपने पुराने राजनीतिक नेटवर्क को नए वार्ड में ट्रांसफर करना। 3 वार्डों में दोनों प्रत्याशी दूसरे वार्ड के वार्ड 130: यहां भाजपा प्रत्याशी सूरज शर्मा वार्ड 132 के वोटर हैं, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी राकेश मीणा वार्ड 131 के वोटर हैं। वार्ड 121 से भाजपा प्रत्याशी नीरज अग्रवाल वार्ड 122 के वोटर हैं।