भास्कर संवाददाता | टोंक लोकतंत्र बचाओ सप्ताह के तहत जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से गुरुवार को ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ पैदल मार्च निकाला गया। गांधी पार्क से घंटाघर तक निकाला गया यह मार्च करीब 100 मीटर की दूरी में ही सिमट गया। कार्यक्रम में कांग्रेस के विभिन्न अग्रिम संगठनों और प्रकोष्ठों के बावजूद करीब 60-70 कार्यकर्ता ही नजर आए। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह कार्यक्रम कांग्रेस के लिए औपचारिकता भर रहने को लेकर चर्चा का विषय बना रहा। खास बात यह रही कि जिले में हाल ही में हुए नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस के 112 पार्षद निर्वाचित हुए हैं। इसके बावजूद वोट बचाओ-देश बचाओ अभियान में बड़ी संख्या में निर्वाचित पार्षदों और पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी नहीं दिखी। कांग्रेस के सेवादल, युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस, अल्पसंख्यक कांग्रेस, खेल प्रकोष्ठ, किसान, एससी-एसटी सहित कांग्रेस के कई अग्रिम संगठन होने के बावजूद संख्या सीमित रहना चर्चा का विषय रहा। इस मौके कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष रामबिलास चौधरी, पूर्व जिलाध्यक्ष हरि प्रसाद बैरवा, किशन फागोडिया, देवकरण गुर्जर, चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव, सेवादल के अब्दुल खालिक खान, पूर्व पार्षद कमलेश चावला, पूर्व प्रवक्ता यूसुफ खान यूनिवर्सल, अल्पसंख्यक विभाग के सैयद बरकात हसीन, खेल प्रकोष्ठ के इम्तियाज खान, ग्रामीण ब्लॉक अध्यक्ष कैलाशी मीणा, तुलसीराम मीणा, जर्रार अहमद, रामलाल संडीला, राजेंद्र बोकण, पार्षद आमिर फारूख, मोहम्मद इरशाद सहित करीब 60-70 कार्यकर्ताओं ने गांधी पार्क में सभा की। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाए। नेताओं ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कांग्रेस नेताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा भी उठाया। कांग्रेस का यह अभियान मताधिकार और चुनाव प्रक्रिया को लेकर पार्टी की ओर से देशभर में चलाए जा रहे लोकतंत्र बचाओ सप्ताह का हिस्सा था। हालांकि कार्यक्रम में कांग्रेस के विधायक, सांसद, सभापति सहित कई प्रमुख नेता नजर नहीं आए। पार्टी के कुछ कार्यकर्ता आपस में यह चर्चा करते भी नजर आए कि संगठन में टिकट और अवसर कई बार उन लोगों को मिल जाते हैं, जो नियमित रूप से कांग्रेस कार्यालय की सीढ़ियां तक नहीं चढ़ते। कार्यकर्ताओं की यह नाराजगी संगठन के भीतर सक्रिय होने के साथ ही चर्चा का विषय बनती जा रही है।