अभियान के तहत जिला रसद अधिकारी, प्रवर्तन अधिकारी और प्रवर्तन निरीक्षक घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन करेंगे। आदेश के अनुसार, जिला रसद अधिकारी को महीने में 8 दिन, प्रवर्तन अधिकारी को 12 दिन और प्रवर्तन निरीक्षक को 15 दिन क्षेत्र में सर्वे कार्य करना होगा। जांच के दौरान संपन्न, टैक्सपेयर या सरकारी नौकरी वाले परिवारों को स्वेच्छा से नाम हटवाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। वंचितों के ऑनलाइन आवेदन पोर्टल के माध्यम से भरवाए जाएंगे। सवाल : किन क्षेत्रों को इस विशेष सर्वे अभियान के दायरे में रखा गया है? जवाब : जिले की चार पालिकाओं डेगाना, बासनी, मेड़तारोड और रियांबड़ी के कुल 8 ऐसे वार्डों को चिह्नित किया गया है, जहां 2011 की जनगणना के मुकाबले 80% से ज्यादा लोग खाद्य सुरक्षा का लाभ ले रहे हैं। डेगाना का 1, बासनी के 4, मेड़तारोड के 2 और रियांबड़ी का 1 वार्ड इसमें शामिल है। सवाल : किन लोगों को योजना से बाहर किया जाएगा? जवाब : जो व्यक्ति या परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के बहिष्करण श्रेणी में आते हैं, यानी जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं, इनकम टैक्सपेयर हैं, या सरकारी सेवा व अन्य पात्रता मानदंडों के दायरे से बाहर हैं, उन्हें इस योजना से हटाया जाएगा। सवाल : यदि कोई अपात्र व्यक्ति खुद नाम नहीं कटवाता है, तो विभाग क्या कार्रवाई करेगा? जवाब : स्वेच्छा से नाम हटाने के लिए प्रेरित करने के बाद भी यदि अपात्र लोग सूची से नाम नहीं हटवाते हैं, तो विभाग द्वारा उन्हें सख्त नोटिस जारी किए जाएंगे और नियमानुसार कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उनके नाम सूची से हटाए जाएंगे। भास्कर न्यूज | नागौर खाद्य सुरक्षा योजना का गलत तरीके से लाभ लेने वालों पर अब प्रशासनिक शिकंजा कसना शुरू हो गया है। नागौर जिले की 4 पालिकाओं के 8 वार्ड ऐसे सामने आए हैं, जहां वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुकाबले 80 प्रतिशत से अधिक आबादी खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ उठा रही है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने अक्टूबर से दिसंबर तक चरणबद्ध तरीके से विशेष गिवअप अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसके तहत अपात्रों को योजना से बाहर किया जाएगा और जरूरतमंद पात्र परिवारों को जोड़ा जाएगा। जानकारी के अनुसार जो व्यक्ति या परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के बहिष्करण श्रेणी में आते हैं, यानी जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं, इनकम टैक्स भी देते हैं, या सरकारी सेवा और अन्य पात्रता मानदंडों के वृहद दायरे से बाहर हैं, उन्हें ही इस जरूरी योजना से हटाया जाएगा।