दसलक्षण महापर्व के पावन अवसर पर 10 उपवास की कठिन साधना पूर्ण करने वाले तपस्वियों के सम्मान एवं अनुमोदना में नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में समाजजनों ने शामिल होकर तपस्वियों की साधना की अनुमोदना की। प्रतिष्ठाचार्य अंशुल भैयाजी ने भी 10 उपवास कि साधना की। सांस्कृतिक संयोजक अंकित पाटनी ने बताया कि शोभायात्रा जैन जोड़ला मंदिर से प्रारंभ होकर प्रताप चौक, धर्मादा चौराहा, सराफा बाजार, चौमूखा बाजार होते हुए पुनः जैन जोड़ला मंदिर पहुंची। मार्ग में समाजजनों एवं श्रद्धालुओं ने तपस्वियों का स्वागत किया। धार्मिक जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो गया। 10 उपवास की कठिन तपस्या पूर्ण करने वालों में धनेश गोधा, सोनाली गोधा, नरेंद्र जैन, अंकित जैन, नकुल जैन, पर्व जैन एवं पंकज पाटनी शामिल रहे। सभी तपस्वियों ने दस दिनों तक संयम, त्याग और आत्मसाधना के साथ तप आराधना कर समाज के समक्ष प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर मुनिश्री 108 गुरुदत्त सागर जी महाराज, क्षुल्लक 105 मेरुदत्त सागर जी महाराज ने तप की महिमा बताते हुए कहा कि तप आत्मशुद्धि, संयम और कर्मनिर्जरा का महत्वपूर्ण साधन है। अध्यक्ष विनोद बड़जात्या एवं मंत्री अनिल बड़जात्या ने बताया कि शोभायात्रा के समापन पर तपस्वियों का सम्मान किया गया तथा समाजजनों ने उनके तप की अनुमोदना करते हुए मंगलकामनाएं व्यक्त की।