भास्कर न्यूज | राजसमंद शहर में दिगंबर जैन समाज की ओर से चल रहे दशलक्षण महापर्व में गुरुवार को दूसरा दिन उत्तम मार्दव धर्म दिवस के रूप में मनाया गया। धर्मावलंबियों ने मान, अहंकार, अभिमान छोड़ने का संकल्प लिया। आचरण में विनम्रता लाने की बात कही। पूजा विधान चले। जप-तप, साधना का क्रम जारी रहा। कांकरोली में द्वारकेश चौराहा स्थित शांतिनाथ मंदिर में सांगानेर संस्थान जयपुर से आए पं. आयुष जैन के सान्निध्य में पूजा अनुष्ठान हुए। समाज अध्यक्ष कमल कुमार जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे। शुरुआत प्रभु के प्रातःकालीन अभिषेक से हुई। इसके बाद शांतिधारा की गई। मंत्रोच्चार, संगान से माहौल धर्ममय रहा। समाज के महामंत्री सुनील जैन ने बताया, प्रभु के अभिषेक का धर्मलाभ राजेंद्र कुमार, सुनील, अनिल जैन को मिला। प्रथम शांतिधारा का धर्मलाभ महावीर प्रसाद, कमल कुमार जैन को मिला। द्वितीय शांतिधारा में प्रदीप, प्रशांत लुहाड़िया को धर्मलाभ मिला। तृतीय शांतिधारा में दीपक जैन को लाभ मिला। चतुर्थ शांतिधारा अनुष्ठान का धर्मलाभ अनिल, अक्षित जैन ने प्राप्त किया। दीप प्रज्ज्वलन में मनीष सेठी परिवार रहा। स्वधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य नितिन जैन को मिला। आरती का धर्मलाभ दिनेश कुमार गंगवाल को मिला। पं. आयुष जैन ने बताया, दशलक्षण पर्व पर विधान पूजा, प्रतिक्रमण जैसी धार्मिक क्रियाएं होती हैं। मार्दव दिवस के प्रवचन में उन्होंने कहा, मार्दव धर्म अभिमान, अहंकार दूर करना सिखाता है। जीवन व्यवहार में विनम्रता लाना सिखाता है। मान यानी अहंकार को मारना ही मार्दव धर्म है। उन्होंने कहा, अहंकार छोड़कर सहजता, सरलता से जीना सच्चा मार्दव है। इससे पहले बुधवार रात मंदिर के सभागार में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ। विषय रहा, तीर्थ का तड़का भक्ति के साथ...। टीना जैन के निर्देशन में नाट्य प्रस्तुति हुई। लोगों को तीर्थों, तीर्थयात्रा का महत्व बताया गया। समाज अध्यक्ष कमल कुमार जैन ने बताया, शुक्रवार को उत्तम आर्जव दिवस मनाया जाएगा।