जोधपुर के भीतरी शहर स्थित 495 साल पुराने अचलनाथ महादेव मंदिर में श्रावण पूर्णिमा पर विशेष श्रृंगार किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। वहीं भक्तों के लिए प्रसादी का भी आयोजन किया गया। रामकिशोर पुगलिया परिवार की ओर से विशेष पूजा अर्चना की गई। नंदीश व लक्ष्य पुगलिया ने बताया- मंदिर में मोगरा, गुलाब, हजारा, रजनीगंधा सहित सुगंधित पुष्पों से महादेव का श्रृंगार किया गया। श्रृंगार की सजावट के लिए कोलकाता से स्पेशल कारीगर बुलाए गए थे, जिन्होंने 2 दिन की मेहनत के बाद विशेष श्रृंगार किया। बता दें कि पिछले चार दशक से पुगलिया परिवार की ओर से सावन पूर्णिमा पर विशेष श्रृंगार किया जाता है। श्रद्धालु बोले- 35 साल से आ रहे मंदिर मंदिर के पुजारी कैलाश ने बताया- हर साल यहां पूर्णिमा के दिन अमरचंद पुगलिया परिवार की ओर से यहां विशेष श्रृंगार किया जाता है। ये सिलसिला करीब 40 साल से चला आ रहा है। यहां भगवान महादेव का बहुत ही सुंदर और दिव्य श्रृंगार किया गया। वहीं मंदिर में दर्शन करने के लिए आए श्रद्धालु रामेश्वर लाल श्रीमाली ने बताया- मैं बचपन से यहां दर्शन करने के लिए आ रहा हूं। मुझे यहां आते हुए करीब 35 साल हो गए हैं। रोजाना यहां आकर महादेव की पूजा-अर्चना करता हूं। आज यहां बहुत दिव्य श्रृंगार किया गया। कैलाश मुथा ने बताया- मैं करीब 40 वर्षों से यहां आ रहा हूं। यहां बहुत ही दिव्य श्रृंगार किया गया है। मंदिर का इतिहास इस मंदिर का निर्माण विक्रम सम्वत 1588 जेठ सुदी पंचमी 21 मई 1531 को पूरा हुआ। यह मंदिर जोधपुर के महाराजा राव गांगा की रानी नानक देवी ने बनवाया था। जब मंदिर का निर्माण हो रहा था। तब यहां प्राचीन शिवलिंग को अन्य जगह पर स्थापित करने की कोशिश की गई, लेकिन शिवलिंग वहां से हट नहीं सका और अचल रहा। इसलिए मंदिर का नाम अचलनाथ पड़ा। ये मंदिर शहर ही नहीं, आस-पास के क्षेत्रों के लोगों की आस्था का केंद्र भी है।