रामनगरिया इलाके में तीन दिन पहले एटीएम से कैश निकालने के दौरान 41.70 लाख रुपए लूटने के मामले में पुलिस ने गैंग में शामिल अंशु को गिरफ्तार कर लिया। अंशु भरतपुर के नदबई स्थित लालपुर गांव की रहने वाली है। पुलिस ने उसके कब्जे से लूट के 26.80 लाख रुपए बरामद किए हैं। वारदात में शामिल अंशु का प्रेमी मस्तराम और उसके दोस्त करौली निवासी पुष्पेंद्र उर्फ पुस्सी व सुमित जंगम फरार हैं। एक बैंक कर्मचारी की भूमिका भी संदिग्ध सामने आई है। पुलिस इसकी जांच कर रही है। डीसीपी ईस्ट रंजिता शर्मा ने बताया कि 14 सितंबर सुबह करीब 10:30 बजे अक्षयपात्र मंदिर के पास स्थित बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम से बैंक कर्मचारी कैश निकालकर बाहर ला रहे थे। तभी बाइक सवार दो बदमाशों ने हथियार की नोक पर कर्मचारियों को डरा-धमकाकर 41.70 लाख रुपए लूट लिए। तीन दिन की छुट्टियों के चलते एटीएम में भारी नकदी जमा हो गई थी। वारदात के बाद एडिशनल डीसीपी पारस जैन के सुपरविजन में गठित टीम के सदस्य बन्ना लाल, हेमंत व राजेश ने एक हजार से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। इसमें सामने आया कि अंशु पिछले कई दिनों से एटीएम की रैकी कर रही थी। इसके बाद पुलिस ने उसे चिन्हित कर पकड़ लिया। अंशु की रैकी; पैसे लेने को महिला स्टाफ ही जाता, आधे घंटे पहले पहुंची कर्मचारी आते ही प्रेमी को दी सूचना पूछताछ में सामने आया कि अंशु के प्रेमी करौली निवासी मस्तराम मीणा का एक कर्मचारी परिचित है, जिसे वह ‘मीणा जी’ कहकर संबोधित करता था। उसी ने इनपुट दिया था कि अक्षयपात्र स्थित बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम से पैसे निकालने के लिए ज्यादातर महिलाएं आती हैं। इनमें केवल एक पुरुष रहता है और उनके साथ कोई सुरक्षा गार्ड भी नहीं होता। ऐसे में पैसे लूटना आसान हो सकता है। इसके बाद मस्तराम ने अंशु की मुलाकात अपने दोस्त करौली निवासी पुष्पेंद्र उर्फ पुस्सी मीणा और सुमित जंगम से कराई। सभी ने अंशु के कमरे पर एकत्रित होकर साजिश रची और उसे रैकी के लिए भेजा। वारदात वाले दिन सुबह ही अंशु को एटीएम के पास भेज दिया गया। सुबह 10:30 बजे जैसे ही बैंक कर्मचारी कैश निकालने पहुंचे, अंशु ने कॉल कर इसकी सूचना दी और वहां से निकल गई। कुछ समय बाद बदमाश मौके पर पहुंचे और हथियारों की नोक पर बैंक कर्मचारियों को धमकाकर रुपए लूट ले गए। नाकाबंदी से बचने के लिए कार में पहुंचाया बैग, अंशु के कमरे पर जाकर बदले कपड़े बदमाश बाइक पर वारदात करने पहुंचे थे। इसके बाद पुलिस नाकाबंदी से बचने के लिए रुपयों का बैग कुछ दूरी पर खड़े कार सवार साथी को दे दिया। कार में ही रुपयों के दो हिस्से किए गए। एक हिस्सा अंशु के कमरे में रखे सूटकेस में छिपा दिया और दूसरा हिस्सा एक बदमाश अपने साथ ले गया। आरोपियों ने अंशु के कमरे पर कपड़े भी बदले। अब फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए संभावित ठिकानों पर छापे मारे जा रहे हैं। फरार आरोपियों को पकड़ने को छापे प्राथमिक जांच में सामने आया कि अंशु और उसके साथियों पर कर्ज था। इसलिए सभी ने मिलकर लूट की साजिश रची। इसके लिए परिचित बैंक कर्मचारी से जानकारी ली गई। उसी ने बताया कि यहां कैश डिपॉजिट मशीन लगी है और इसमें ज्यादा नकदी रहती है। आरोपियों ने 14 सितंबर इसलिए चुना, क्योंकि इससे पहले तीन दिन छुट्टियां थीं और नकदी ज्यादा थी। फरार सरगना मस्तराम और अन्य साथियों को पकड़ने के लिए एक दर्जन टीमें करौली, धौलपुर, सवाईमाधोपुर और भरतपुर में छापे मार रही है।